कोमलता ,निर्मलता ,विनय उत्तम मार्दव धर्म है।नम्रता,सरलता अमृत हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
सीकर
धर्म सभा में प्रवचन में आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर महाराज ने बताया कि मार्दव धर्म कोमलता का सूचक है नर्म मिट्टी को कुंभकार मनचाहा रूप देता हैं आप भी जीवन में सरलता कोमलता से जीवन को मनचाहा आकार दे सकते हो,कृषक फसल लेने के बाद खाली खेत को धूप में तपा कर हल चलाकर नर्म बनाकर फसल के लिए तैयार करता हैं। क्रोध मान से जीवन में विकृति आती हैं मान ऐसी मीठी कषाय है ,जिसके कारण व्यक्ति भीतर भीतर झुलसता रहता है।

जो जितना झुकता है वह उतना ही ऊंचा उठता है विनय गुण से मोक्ष का द्वार खुल जाता है ।विनय के अभाव में संपूर्ण शिक्षा निरर्थक है ,विनय के अभाव में सम्यक दर्शन नहीं रह सकता है 8 प्रकार के मद कुल, रूप ,जाति, बुद्धि ,तप, श्रुत और शील आदि के विषय में थोड़ा सा भी किंचित मात्र भी गर्व नहीं करता है ,उसके पास मार्दव धर्म प्रगट होता है। वह मार्दव धर्म का धारी होता है । संघ और पर्व चिकित्सालय हैं जो आत्मा की विकृति धर्म से दूर करते है यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की विवेचना करते हुए प्रकट की डॉ राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने आगे बताया कि मान जहर हैं नम्रता, सरलता विनय अमृत समान सुख देते हैं विनय मोक्ष का द्वार है। कुएं से बाल्टी झुकाने पर पर ही पानी आता है इस कारण जीवन में नम्रता जरूरी है। बड़प्पन लघुता से मिलता हैं और लघुता से प्रभुता मिलती हैं अभिमान और स्वाभिमान में अंतर है स्वाभिमान आत्मा का धर्म का,जैन कुल का होना चाहिए।मार्दव भाव आत्मा का गुण है मोक्ष सुख का कारण है यह मार्दव धर्म अहंकार का नाशक है। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री प्रभव सागर जी ने उपदेश में बताया कि दश धर्म मुनियों और श्रावकों दोनों के लिए होते हैं ।इसके पूर्व आचार्य श्री के सानिध्य में विधानाचार्य कीर्तिय जी के निर्देशन में श्री जी का पंचामृत अभिषेक शांतिधारा पुण्यार्जक परिवार द्वारा की गई । अनुसार संघ की आहारचर्या के बाद दोपहर को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा तत्वार्थ सूत्र की विवेचना की गई।अनेक साधुओं और श्रावक श्राविकाओं द्वारा उपवास व्रत आराधना कर कर्मों की निर्जरा की जा रही हैं।शाम को श्रीजी ओर आचार्य श्री की आरती के बाद स्थानीय महिला मंडल द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए ।भादव शुक्ल सप्तमी उत्तम आर्जव धर्म दिवस सन 1950 में जन्मे पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 77 वा” जन्म जयंती महोत्सव समाज को मनाने का अवसर मिला है।इस अवसर पर पुण्यशाली परिवार द्वारा चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की जाकर अनेक द्रव्यों विभिन्न फल ,फूल नैवेद्य ,सूखे मेवे ,श्रीफल आदि से आचार्य श्री की भक्ति संगीतमय पूजन की जावेगी। इस अवसर पर देश के अनेक नगरों से भक्त भी आ रहे है।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312
