आत्मा की पहचान होते ही पिघलता है अहंकार, विनय ही उत्तम मार्दव का स्वरूप : आचार्य श्री सुनील सागर जी
नेमी नगर जैन कॉलोनी में पर्युषण पर्व पर अध्यात्म योग, मंगल प्रवचन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और भक्तिमय आरती का आयोजन
इंदौर।
पर्युषण महापर्व के पावन अवसर पर नेमी नगर जैन कॉलोनी में उत्तम मार्दव धर्म की आराधना श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ की गई। दिन का शुभारंभ प्रातःकालीन मंगल बेला में अध्यात्म योग से हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने ध्यान, साधना और आत्मचिंतन के माध्यम से अंतर्मन की आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने का प्रयास किया।
इसके पश्चात आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज का उत्तम मार्दव धर्म पर मंगल प्रवचन हुआ। गुरुदेव ने कहा कि मार्दव का अर्थ केवल व्यवहार में विनम्र दिखाई देना नहीं, बल्कि मन से मान और अहंकार का विसर्जन करना है। जब मनुष्य अपने पद, प्रतिष्ठा, ज्ञान, धन और उपलब्धियों के अभिमान से ऊपर उठकर अपने वास्तविक आत्मस्वरूप को पहचानने लगता है, तभी उसके जीवन में सच्चे मार्दव का प्राकट्य होता है।

आचार्य श्री ने कहा कि अहंकार व्यक्ति को दूसरों से दूर करता है, जबकि विनम्रता रिश्तों में मधुरता और आत्मा में शांति का संचार करती है। उत्तम मार्दव धर्म हमें यह दृष्टि देता है कि कोई जीव छोटा या बड़ा नहीं है। प्रत्येक जीव अपने आत्मस्वरूप में समान है। इसलिए जीवन में नम्रता, सरलता, विनय और निरंतर आत्मचिंतन को स्थान देना आवश्यक है।
गुरुदेव के प्रवचन से श्रद्धालुओं को मान-कषाय को कम करने और जीवन में विनय का भाव विकसित करने की प्रेरणा मिली। उपस्थित धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने उत्तम मार्दव के संदेश को आत्मसात करते हुए अहंकार से दूर रहने तथा सरल एवं विनम्र जीवन जीने का संकल्प लिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
संध्याकाल में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक संदेशों से ओतप्रोत विभिन्न प्रस्तुतियां दी गईं। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से धर्म के गूढ़ संदेशों को रोचक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
भक्तिमय आरती से हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में भक्तिमय आरती का आयोजन किया गया। दीपों की जगमगाहट, भक्ति के स्वरों और श्रद्धालुओं की सामूहिक सहभागिता से नेमी नगर जैन कॉलोनी का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।
इस प्रकार अध्यात्म योग, आचार्य श्री के मंगल प्रवचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और भक्तिमय आरती के साथ उत्तम मार्दव धर्म का दिवस श्रद्धा, भक्ति और आत्मचिंतन का संदेश देते हुए संपन्न हुआ।
माही जैन धीरावत, पीपलखूंट (प्रतापगढ़) से प्राप्त जानकारी।
संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
मो. 9929747312








