चमकदार केतली में आती थी ‘मोदी परिवार की चाय’, कोटा की सुधा शर्मा ने सुनाया 1957-58 का बचपन का किस्सा

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चमकदार केतली में आती थी ‘मोदी परिवार की चाय’, कोटा की सुधा शर्मा ने सुनाया 1957-58 का बचपन का किस्सा

 

पीएम मोदी के जन्मदिन पर वडनगर की पुरानी यादें हुईं ताजा, रेलवे स्टेशन से जुड़ा है रोचक संस्मरण

 

कोटा।

चांदी जैसी चमकती केतली, हाथ में चाय के गिलास और वडनगर रेलवे स्टेशन का वह दौर… करीब सात दशक बाद भी कोटा निवासी 73 वर्षीय सुधा शर्मा के जेहन में बचपन की ये तस्वीरें आज भी ताजा हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर वडनगर से जुड़ी उनकी ये पुरानी यादें एक बार फिर चर्चा में हैं।

 

सुधा शर्मा के अनुसार, यह बात वर्ष 1957-58 की है। उस समय वे पांचवीं कक्षा में पढ़ती थीं और उनके पिता वीपी तिवारी वडनगर रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर के पद पर तैनात थे। पिता की नौकरी के कारण परिवार का जुड़ाव गुजरात के वडनगर से हुआ था।

 

लकड़ी की छोटी-सी दुकान से रेलवे स्टेशन तक पहुंचती थी चाय

 

सुधा शर्मा ने राजस्थान पत्रिका से बातचीत में बताया कि उस समय वडनगर में मोदी परिवार की लकड़ी की एक छोटी-सी चाय की दुकान हुआ करती थी। उनके अनुसार, नरेंद्र मोदी और परिवार के अन्य सदस्य उस दौर में दुकान पर चाय बनाने और बेचने का काम करते थे।

 

सुधा की यादों के मुताबिक, दुकान से चाय चमकदार केतली में भरकर रेलवे स्टेशन तक लाई जाती थी। वे बताती हैं कि बच्चे नेकर पहनकर चाय लेकर स्टेशन आया करते थे। उस समय पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर बैठना और वहां चाय आते देखना उनके बचपन का सामान्य हिस्सा था।

 

लेकिन वक्त गुजरने के साथ वही सामान्य से लगने वाले पल अब उनके लिए बेहद खास स्मृतियां बन गए हैं।

 

पिता को पसंद थी मोदी परिवार की चाय

 

सुधा शर्मा बताती हैं कि उनके पिता को उस दुकान की चाय काफी पसंद थी। वे अक्सर वहीं से चाय मंगवाते थे। चाय केतली में रेलवे स्टेशन पहुंचती और फिर पिता के साथ वेटिंग रूम में बैठकर चाय पीने का वह सिलसिला उनकी बचपन की यादों में बस गया।

 

सुधा के लिए उस समय यह महज रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था, लेकिन आज करीब सात दशक बाद पीछे मुड़कर देखने पर वे छोटे-छोटे प्रसंग उन्हें बेहद महत्वपूर्ण नजर आते हैं।

 

आज भी वडनगर पहुंचकर तलाशती हैं बचपन की वह जगह

 

सुधा शर्मा के मुताबिक, जब भी वे वडनगर जाती हैं तो उस स्थान को जरूर देखती हैं, जहां कभी मोदी परिवार की चाय की दुकान हुआ करती थी। वह जगह उनके लिए केवल एक पुरानी दुकान की जगह नहीं, बल्कि उनके पिता की नौकरी और बचपन की स्मृतियों से जुड़ी हुई है।

 

वडनगर में बीता बचपन, यादों में आज भी जिंदा है शहर

 

सुधा ने बताया कि उन्होंने पांचवीं कक्षा तक गुजराती माध्यम से पढ़ाई की। वडनगर का हाटकेश्वर महादेव मंदिर भी उनकी बचपन की स्मृतियों का हिस्सा रहा है।

 

उनका कहना है कि वडनगर उनके लिए सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि उनके बचपन, पिता की नौकरी और उन दिनों की अनगिनत यादों से जुड़ा हुआ स्थान है। वर्षों बीत जाने के बावजूद वहां बिताए वे पल आज भी उनकी स्मृतियों में उसी तरह सुरक्षित हैं।

 

स्रोत: राजस्थान पत्रिका पोर्टल   आलेख

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