गरीबों के आंसू पोंछें, रोगियों का कष्ट दूर करें—यही हो जिन शासन एकता संघ का संकल्प : सुधासागर महाराज
इंदौर में राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ का राष्ट्रीय अधिवेशन, सेवा और समर्पण को लेकर देशभर से जुटे प्रतिनिधि
इंदौर।
“किसी भी संगठन की वास्तविक शक्ति उसके समर्पित कार्यकर्ता होते हैं। हमें जाति, संस्था या संगठन के भेद से ऊपर उठकर समाज सेवा के लिए आगे आना है। गरीब के आंसू पोंछने और रोगी का कष्ट दूर करने के लिए अपनी सामर्थ्य के अनुसार हर व्यक्ति को योगदान देना चाहिए।”
यह प्रेरणादायी संदेश राष्ट्रसंत, राजकीय अतिथि मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने दलाल बाग में आयोजित राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के विशाल राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए दिया।
मुनिश्री ने कहा कि संगठन की शुरुआत मंदिर के बाहर सड़क पर समाजसेवा के संकल्प के साथ हुई थी। आज यह संकल्प व्यापक रूप ले रहा है। उन्होंने सेवा की भावना को सहज उदाहरण से समझाते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की जेब में एक नहीं, बल्कि दो रूमाल होने चाहिए—एक अपने चेहरे की चमक के लिए और दूसरा किसी दुखी व्यक्ति की आंखों के आंसू पोंछने के लिए।
उन्होंने कहा कि सेवा के लिए बड़ा पद या बड़ी आर्थिक क्षमता जरूरी नहीं है। व्यक्ति अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार किसी न किसी जरूरतमंद की मदद कर सकता है। महिलाओं की शक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब महिलाएं किसी संकल्प को दृढ़ता से लेती हैं तो उसे पूरा करके ही दम लेती हैं। संघ द्वारा किया जा रहा यह प्रयास जितना किया जाए, उतना ही कम है।
एक संगठन के नीचे काम करने का संकल्प साकार हो रहा : जस्टिस अभय गोयल
अधिवेशन में जस्टिस अभय गोयल ने कहा कि दो वर्ष पूर्व सागर में परम पूज्य राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के सान्निध्य में एक संगठन के नीचे मिलकर काम करने का संकल्प लिया गया था। अब धीरे-धीरे वह संकल्प साकार रूप ले रहा है।
उन्होंने कहा कि अभी सेवा के क्षेत्र में बहुत सी संभावनाएं हैं, जिन पर काम किया जाना बाकी है। सेवा और समर्पण की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रत्येक व्यक्ति को सहयोग के लिए अपना हाथ आगे करना होगा। तभी संगठन अपने उद्देश्यों को पूरी तरह प्राप्त कर सकेगा।
संगठन की मजबूती के लिए लगातार प्रयास
इस अवसर पर संगठन प्रमुख राकेश बाबा ने संगठन की मजबूती के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अभी बहुत काम किया जाना बाकी है और संगठन को सेवा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।
विपिन सिंघई ने रोगियों की सेवा को बड़ा पुण्य कार्य बताते हुए कहा कि भले ही कोई व्यक्ति अपने गांव में एक वृद्ध की मदद करे, लेकिन संगठन के रूप में भी कुछ न कुछ सेवा कार्य अवश्य किया जाना चाहिए।
संगठन के साथ लक्ष्य हासिल करना आसान : इंदौर जिला जज
इंदौर जिला जज कुलदीप ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से किसी बड़े लक्ष्य को हासिल करना कठिन होता है, लेकिन संगठन के रूप में काम करने से लक्ष्य की दिशा स्पष्ट होती है और हौसला भी लगातार बढ़ता जाता है। जब लोग एक उद्देश्य निर्धारित कर सामूहिक रूप से आगे बढ़ते हैं तो सफलता की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाती हैं।
इंदौर सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद नवीन गोधा ने कहा कि इंदौर शहर से राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के सेवा कार्यों की गूंज पूरे देश में सुनाई देगी। आने वाले समय में यहां से ऐसे कार्य किए जाएंगे, जिनका संदेश देशभर तक पहुंचेगा।
इस दौरान मयंक जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
‘मेरे हाथों पाप नहीं होना चाहिए, इसके लिए पूरा पुरुषार्थ करूंगा’
अधिवेशन में मुनिश्री सुधासागर महाराज ने धर्म और पुरुषार्थ के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान का ज्ञान और कर्म का सिद्धांत अपनी जगह सत्य है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं कि मनुष्य पुरुषार्थ करना छोड़ दे। सच्चा धर्म भाग्यवाद नहीं, बल्कि जागरूक पुरुषार्थ की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि एक क्षण का धर्मानंद संसार के अनेक सुखों से महान है। धर्म की वास्तविक अनुभूति बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आत्मा की चेतना में होती है। जब व्यक्ति को सम्यक दर्शन की अनुभूति होती है और वह क्षणभर के लिए भी आत्मा के शुद्ध स्वरूप का अनुभव कर लेता है, तो संसार के अनेक सुख-दुख उसके सामने छोटे प्रतीत होने लगते हैं।
मुनिश्री ने कहा कि धर्म का आनंद इतना गहरा है कि उसके सामने संसार के कष्ट भी छोटे पड़ जाते हैं। यह मृत्यु की कामना नहीं, बल्कि धर्म के प्रति ऐसी दृढ़ निष्ठा है जिसमें मृत्यु का भय भी कमजोर पड़ जाता है।
संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312
