आचार्य श्री अनेकांत सागर महाराज ने आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज को तीर्थ संरक्षक संवर्धक की उपाधि से अलंकृत किया
उज्जैन
सप्तम पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 अनेकांत सागर महाराज का शनिवार की प्रातः बेला में तपोभूमि उज्जैन में मंगल प्रवेश हुआ मंगल प्रवेश की बेला में तपोभूमि भूमि में विराजमान तपोभूमि प्रणेता आचार्य गुरुवर प्रज्ञा सागर महाराज ने संघ सहित गुरुवर की अगवानी की।
बैंड बाजा के साथ एवं जयकारों के बीच गुरुवार को तपोभूम भूमि के अंदर प्रवेश कराया गया प्रवेश की बेला में आचार्य श्री अनेकांत सागर महाराज के साथ समस्त मुनि राजो ने तपोभूमि के दर्शन किए मूल नायक भगवान आदिनाथ के चरणों में वंदन किया।

इस अवसर पर तपोभूमि कमेटी द्वारा आचार्य गुरुवर अनेकांत सागर महाराज का पद प्रक्षालन किया। इस अवसर पर तपोभूमि प्रणेता आचार्य गुरुवर 108 प्रज्ञा सागर महाराज ने भी अपना उद्बोधन प्रदान किया।



इस अवसर पर आचार्य गुरुवर अनेकांत सागर महाराज ने भी अपना उद्बोधन प्रदान किया एवं तपो भूमि प्रणेता आचार्य गुरुवर 108 प्रज्ञा सागर महाराज को तीर्थ संरक्षक संवर्धक की उपाधि से अलंकृत किया।

पूज्य आचार्य श्री ने उपाधि देते हुए अलंकरण पत्र में लिखा
तीर्थ हमारे धर्म के आस्था के केन्द्र हैतीर्थ चित्त की चेतना जागृत करते हैतीर्थ एनर्जी एण्ड पावर के टॉवर है।द्रव्य तीर्थ और भाव तीर्थ का अन्योन्य संबंध है तीर्थ का अर्थ आगम -धर्म-पवित्र स्थल-आत्मा होता है.तीर्थकर धर्मतीर्थ के प्रवर्तक होते है।
तीर्थंकर के लघुनंदन भक्तवात्सल्य बालयोगीआचार्य श्री प्रज्ञासागर जी.के पुण्यशाली व्यक्तित्व एवं कृतित्व से अभीभूत होकर चारित्र चक्रवर्ती प्रथमाचार्य श्री शांतिसागरजी कीकी अक्षुण्ण परंपरागत
वर्तमान सप्तम पहाधीश परम पूज्य 108 आचार्य श्री अनेकांत सागर जी महाराज ने श्री शांतिसागरम् तीर्थ भोज कर्नाटक के सर्वांगीण विकास से प्रभावित होकर तीर्थ संरक्षक संवर्धक की उपाधि से अलंकृत करता हूँ।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट9929747312
