जो हमारा नहीं उसे अपना मानते हैं और जो है उस पर ध्यान ही नहीं हैआचार्य श्री’

धर्म

‘जो हमारा नहीं उसे अपना मानते हैं और जो है उस पर ध्यान ही नहीं है’ आचार्य श्री

बिज़ोरा

हम कहां से आ रहे हैं यह तो आपको मालूम है परंतु हम कहां जा रहे हैं यह हम आप को नहीं बताएंगे। सुनना है तो सुन लो और गुनना है तो गुन लो। यह बात आचार्य विद्यासागर महाराज ने देवरी के नजदीक फोर लाइन पर स्थित बिजोरा ग्राम में कही। आचार्य ने कहा कि जो हमारा नहीं है उसे हम अपना मानते है और जो हमारा है उसकी तरफ हमारा ध्यान ही नहीं है। जैसे मृग जंगल में इधर-उधर भागता रहता है मालूम करने के लिए कि खुशबू कहां से आ रही है जबकि खुशबू उसके स्वयं के अंदर से ही आती है।

संकलित दैनिक भास्कर

अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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