संसार में सत्संग के अलावा कहीं ज्ञान की प्राप्ति नहीं होगी स्वस्तिभूषण माताजी

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संसार में सत्संग के अलावा कहीं ज्ञान की प्राप्ति नहीं होगी स्वस्तिभूषण माताजी

मुरैना
परम पूज्या भारत गौरव स्वस्ति धाम प्रणेता गणिनी आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी ने अपने उद्बोधन में सत्संग का महत्व समझाया पूज्य माता जी ने दिगंबर जैन बड़ा पंचायती मंदिर मे कहा की ईश्वर को प्राप्त करने का एक ही मार्ग है वह सत्संग सत्संग से ही हमें सभी प्रकार का ज्ञान मिलता है। संसार में सत्संग के अलावा कहीं ज्ञान की प्राप्ति नहीं होगी। चाहे आप संसार घूम ले।

 

 

 

ज्ञान की प्राप्ति तो केवल सत्संग से ही हो सकती है रविवार को जैन बड़ा पंचायती मंदिर में बोलते हुए माताजी ने कहा कि परमात्मा सभी जगह है लेकिन परमात्मा को प्राप्त करने के लिए सत्संग बहुत जरूरी है। इसका महत्व बताते हुए कहा कि सत्संग करने वाला कभी जीवन में दुखी नहीं हो सकता। और उनका कारोबार भी खूब चलेगा। सत्संग से ही अमृत की वर्षा होती है। उन्होंने तपस्या से बढ़कर सत्संग को बताया। परमात्मा की जी के ऊपर कृपा होती है तभी सत्संग सुनने का मौका मिलता है। संत का महत्व बताते हुए कहा कि जो किसी प्रकार की आशा नहीं रखता वही संत कहलाता है। जो भी व्यक्ति सत्संग यज्ञ कर लेता है उससे सभी तरह के यज्ञ हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह हम लोगों का पुण्य ही है जो हम लोगों को इतने संत के दर्शन हो रहे हैं।

 

 

 

माताजी ने सीख देते हुए कहा कि मन को समझा लीजिए, मन को सत्संग में लगा दीजिए। क्योंकि भाग्य से ही सत्संग मिलता है। और जो संत की शरण में रहते हैं उनका उद्धार हो जाता है। सत्संग करने से तत्काल लाभ मिलता है। पूरा मन सत्संग रूप में बह जाता है। सत्संग करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

 

भगवान कुछ नहीं करते, कुछ नहीं देते हैं। हमें भगवान नहीं जगाते, भगवान के दर्शन से जो आनंद की भक्ति की अनुभूति होती है, तो वह हमारा जागरण कराती है। उन्होंने कहा संसार में आज तक कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं हो पाया है। संसार मैं संपूर्णता नहीं है। कुछ ना कुछ हमारे जीवन में अपूर्ण रहता है। कोई ना कोई कमी हमें रहेगी जो सुख हमें भगवान के दर्शन से मिलता है संसार में कहीं नहीं। यही पूर्णता है और यही संपूर्णता है। पूज्य माता जी ने कहा कि हमारे जीवन में संपूर्णता होनी चाहिए। हमारे जीवन में पूर्णता की अनुभूति होना चाहिए। तभी संसार को पार कर सकते हैं।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी

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