मुनि संघ ने अपने उद्बोधन मे मानव को मन की पावनता व कर्मो की पवित्रता बनाए रखने की सीख दी
भीलूडा
पूज्य मुनि श्री प्रश्मानंद महाराज व मुनि श्रीशिबानंद सागर महाराज ने उद्बोधन दिया सबसे पहले बोलते हुए मुनि श्री प्रश्मानंद सागर महाराज ने मानव को मन की पावनता व पवित्रता बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा अपने स्त्रोत से निकलने वाली हर नदी का समावेश सागर मे होता है। उसी प्रकार जन्म लेने वाले मनुष्यों का अंत भी म्रत्यु रूप मे होना है। उन्होने आगे कहा नदी अपने जल की पवित्रता व उपयोगिता को सदा बनाए रखती है,उसी प्रकार मानव को मन की पावनता व पवित्रता को सदा बनाये रखना होगा।
पूज्य मुनि श्री शिवानंद सागर महाराज ने भक्ति व कर्म फल की पवित्रता पर जोर देते हुए कहा की भक्ति से ही कर्मो की निर्मलता आती है, व अपने कर्मो का ही फल भोगते है, मनुष्य अपने कर्म स्वयम ही अर्जित करता है। इस कारण कर्मो की पवित्रता जरुरी है। आगे बोलते हुए कहा की हमारे तन की नहीं,मन की सुन्दरता अधिक होनी चाहिए। अंत मे कहा मन को कभी मैला नहीं करने वाला सुन्दरता को पाता है।
संकलित अभिषेक जैन लूहाडीया रामगंजमंडी
