आत्मजागृति से मोक्षमार्ग तक—आचार्य श्री सुनील सागर जी ने दिया तीर्थ संरक्षण का संदेश

धर्म

*आत्मजागृति से मोक्षमार्ग तक—आचार्य श्री सुनील सागर जी ने दिया तीर्थ संरक्षण का संदेश*

इंदौर 

नेमी नगर जैन कॉलोनी, इंदौर।आयोजित धर्मसभा में पूज्य आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज के दर्शन एवं आशीर्वाद हेतु JITO के अध्यक्ष कमलेश जी सोजतिया, चांदखेड़ी तीर्थ के अध्यक्ष हुकुमचंद जी काका, तमिलनाडु से पधारे भट्टारक जी सहित अनेक श्रावकगण उपस्थित हुए। सभी ने आचार्य श्री के दर्शन कर धर्मलाभ लिया एवं उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

 

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि मन में आने वाले विचार ही आगे चलकर हमारे कर्मों का कारण बनते हैं। शुभ विचार आत्मा को ऊर्ध्वगति की ओर ले जाते हैं, जबकि अशुभ विचार आत्मा को संसार के बंधनों में और अधिक उलझाते हैं।

 

उन्होंने कहा कि जब मनुष्य इंद्रियों के वश में होकर अपने मार्ग से भटक जाता है, उसी समय आत्मा के आस्रव के द्वार खुल जाते हैं और कर्मों का बंधन प्रारंभ हो जाता है। वहीं आत्मजागृति के साथ जब साधक कर्मों पर विजय प्राप्त करने का प्रयास करता है और सच्चे अर्थों में जिनशासन के मार्ग पर आगे बढ़ता है, तब उसके लिए मोक्षमार्ग के द्वार खुलने लगते हैं।

आचार्य श्री ने कहा कि संसार में कोई नाम का दीवाना है, कोई रूप का तो कोई धन-संपत्ति का; लेकिन वास्तविक सौभाग्यशाली वही है जो देव, शास्त्र और गुरु का दीवाना बन जाए। यही समर्पण मनुष्य के जीवन को सही दिशा प्रदान करता है।

 

तीर्थ संरक्षण को लेकर गुरुदेव ने समाज को जागृत करते हुए कहा कि अब समय है जागने का और अपने तीर्थों से जुड़ने का। उन्होंने गिरनार जी, सम्मेद शिखर जी सहित दक्षिण भारत के तीर्थों की यात्रा करने तथा प्राचीन तीर्थ क्षेत्रों के संरक्षण के लिए समाज को आगे आने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि केवल तीर्थयात्रा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि तीर्थों की सुरक्षा और संरक्षण भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। तीर्थों का जीर्णोद्धार आवश्यक है, तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है और इसके साथ-साथ समाज का जीर्णोद्धार भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

आचार्य श्री ने कहा कि धर्म केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक श्रावक अपने तीर्थ, धर्म और समाज के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझे। यही जागृति आने वाली पीढ़ियों तक जिनशासन की गौरवशाली परंपरा को सुरक्षित रखने का माध्यम बनेगी।

     माही जैन धीरावत पीपलखूंट प्रतापगढ़ से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *