मुनि श्री विमलसागर महाराज ने दीपावली महापर्व पर पटाखे नहीं फोड़ने की सीख देते हुए कहा कि बांसुरी, ढोल, ढोलक आदि यंत्रों को बजाए

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मुनि श्री विमलसागर महाराज ने दीपावली महापर्व पर पटाखे नहीं फोड़ने की सीख देते हुए कहा कि बांसुरी, ढोल, ढोलक आदि यंत्रों को बजाए
खिमलासा
परम पूज्य मुनि श्री 108 विमल सागर महाराज ने नगर में मंगल प्रवचन देते हुए दीपावली महापर्व पर पटाखे नहीं फोड़ने की बात पर जोर देते हुए कहा कि दीपावली महापर्व पर पटाखे नहीं फोड़े, वाद्य यंत्र बजाए, बांसुरी, ढोल, ढोलक, आदि यंत्र बजाएं, गाय के घी का दीपक जलाएं, इसका वैज्ञानिक तथ्य बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे ऑक्सीजन मिलती है।

 

 

पूज्य मुनि श्री भावसागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में पटाखों से होने वाले आर्थिक नुकसान के बारे में सभी को बताया उन्होंने कहा कि पटाखों से हमें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ शारीरिक हानि भी पहुंचती है। बेजुबान पशु पक्षी पीड़ित भयभीत होते हैं।

उन्होंने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि हर साल कई अग्निकांड होते हैं, लाखों करोड़ों रुपए का नुकसान होता है। इसके निर्माण में कई मासूम भोले बच्चे अपनी जीवन लीला समाप्त कर देते हैं। और हमारे लिए पटाखे तैयार करते हैं। पटाखों का त्याग करेंगे तो स्वच्छ, सुंदर, वातावरण,पर्यावरण मिलेगा।

हमारी गली, मोहल्ला, नगर, शहर, गांव, कॉलोनी स्वस्थ बनेगी। रासायनिक जहरीली गैसें व धुएं के प्रदूषण से बचाव होगा। पटाखे खरीदने, बेचने, फोड़ने का त्याग करते हैं तो असंख्यात जीवों की हिंसा के पाप से बच सकते हैं।

मार्मिक बोलते हुए महाराज श्री ने कहा और प्रश्न करते हुए कहा कि करोड़ सूक्ष्म जीवों ने हमारा और आपका क्या बिगाड़ा है। हम पटाखे फोड़कर उन सूक्ष्म जीवों को क्यों मारे, क्यों लाखों भवों का बैर का बंध करें और करोड़ों जीवो को अभयदान दें। हम इसके बिना भी दीपावली मना सकते हैं। पटाखे की आवाज इतनी तेज होती है कि सुनने की क्षमता भी बाधित होती है। खासकर बच्चों बुजुर्गों पर इन पटाखों की आवाज का कुछ ज्यादा ही असर पड़ता है।

जिन पटाखे को चलाकर हम इतने सारे जीवो की हिंसा करते हैं। पटाखों का धुआं बादल बनकर हमारे वायुमंडल को नुकसान पहुंचा रहा है। पटाखों के धुएं से वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है जो सभी के स्वास्थ्य के लिए घातक है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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