संस्कारों की सीख लेकर लौटीं आठ बालिकाएं, रात्रि भोजन त्याग और ब्रह्मचर्य का लिया संकल्प
घाटोल।
बच्चों के जीवन में संस्कारों की नींव मजबूत हो तो उनका भविष्य भी उज्ज्वल बनता है। इसी उद्देश्य को लेकर घाटोल नगर में परम पूज्य आर्यिका 105 अनंतमति माताजी के सानिध्य में संस्कार शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में नौगामा नगर की आठ बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और माताजी के सानिध्य में जीवन को संस्कारमय बनाने के विभिन्न नियमों को अपनाने का संकल्प लिया।
शिविर के दौरान आर्यिका श्री अनंतमति माताजी ने बालिकाओं को धर्म, परिवार, संस्कृति और सदाचार के संस्कारों से जुड़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में अच्छे संस्कार केवल सुनने तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें अपने आचरण में उतारना ही वास्तविक संस्कार है।

मोबाइल के सही उपयोग से लेकर माता-पिता के सम्मान तक दिए संस्कार
बालिकाओं को रात्रि भोजन नहीं करने, अपने कुल की मर्यादा के अनुरूप आचरण करने, कुल को लज्जित न करने, प्रातःकाल माता-पिता को प्रणाम व वंदन करने, रात 9 बजे के बाद मोबाइल का उपयोग नहीं करने तथा मोबाइल पर अश्लील सामग्री नहीं देखने जैसे नियमों के प्रति जागरूक किया गया।

इसके साथ ही साधु-संतों के प्रवचन सुनकर जीवन में धार्मिक एवं नैतिक संस्कार विकसित करने तथा अपनी संस्कृति और धर्म के अनुरूप जीवन जीने की प्रेरणा दी गई।
कई बालिकाओं ने लिए विशेष संकल्प
शिविर में बालिकाओं ने इन संस्कारों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। इस दौरान कई बालिकाओं ने रात्रि भोजन त्याग तथा विवाह तक ब्रह्मचर्य का नियम ग्रहण किया। वहीं घाटोल की एक बालिका ने आजीवन ब्रह्मचर्य का संकल्प लेकर अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
शिविर में भाग लेने वाली बालिकाओं को श्रीफल एवं सफेद साड़ी उपहार स्वरूप प्रदान कर सम्मानित किया गया।
नौगामा की बालिकाओं का नेतृत्व
नौगामा नगर की ओर से मनीषा नानावटी ने बालिकाओं का नेतृत्व किया। संस्कार शिविर ने बालिकाओं में धर्म, संस्कृति, परिवार और आत्मानुशासन के प्रति नई चेतना जगाई।
जैन समाज प्रवक्ता सुरेशचंद्र गांधी से प्राप्त जानकारी।
संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
मोबाइल : 9929747312


