रक्षाबंधन पर सिर्फ बहन नहीं, हर बेटी की रक्षा का लें संकल्प : पुलकसागर महाराज
भाई से लें ऐसा वचन—घर की बहन जैसा सम्मान हर बेटी को देंगे, किसी से छेड़छाड़ नहीं करेंगे; धर्म, समाज और राष्ट्र की रक्षा का भी लिया जाए संकल्प
भीलवाड़ा।
रक्षाबंधन केवल कलाई पर राखी बांधने और बहन की रक्षा का वचन देने का पर्व नहीं है, बल्कि हर बहन-बेटी के सम्मान, सुरक्षा और स्वाभिमान की रक्षा का संकल्प लेने का अवसर है। राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने रक्षाबंधन के पर्व पर यह संदेश देते हुए समाज को अपनी सोच और संकल्प का दायरा व्यापक करने का आह्वान किया।
चित्रकूटधाम में ज्ञान गंगा महोत्सव के अंतर्गत आयोजित रक्षाबंधन महोत्सव में प्रवचन करते हुए महाराज ने कहा कि बहनें जब अपने भाई की कलाई पर राखी बांधें तो उससे केवल अपनी रक्षा का वचन न लें, बल्कि यह भी संकल्प दिलाएं कि जिस सम्मान और सुरक्षा का भाव वह अपनी बहन के लिए रखता है, वही सम्मान घर के बाहर हर बहन और बेटी के लिए भी रखेगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी बेटी के साथ छेड़छाड़ या दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए। समाज में महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून या व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के संस्कार और चरित्र की परीक्षा भी है।
धर्मस्थलों की रक्षा का भी हो संकल्प
पुलकसागर महाराज ने कहा कि रक्षाबंधन पर परिवार की रक्षा के साथ-साथ धर्म, समाज और राष्ट्र की रक्षा का संकल्प भी लिया जाना चाहिए। धर्मस्थलों और तीर्थों के संरक्षण के प्रति समाज में जिम्मेदारी का भाव मजबूत होना आवश्यक है।
उन्होंने सनातन धर्म और जैन धर्म के अनुयायियों से एक-दूसरे के तीर्थस्थलों एवं धार्मिक स्थलों के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक चेतना अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की मजबूत नींव पर टिकी है। इनमें से किसी एक परंपरा को कमजोर करने का असर पूरे देश की आध्यात्मिक चेतना पर पड़ सकता है।
बेटियों को स्वतंत्रता मिले, लेकिन स्वच्छंदता नहीं
महाराज ने बेटियों की स्वतंत्रता को आवश्यक बताते हुए कहा कि नारी को आगे बढ़ने के पूरे अवसर मिलने चाहिए, लेकिन स्वतंत्रता का अर्थ स्वच्छंदता नहीं है। जीवन में स्वतंत्रता के साथ संस्कार, मर्यादा और जिम्मेदारी का होना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने समाज की दोहरी मानसिकता पर भी तीखा प्रहार किया। कहा कि रावण का दहन करना आसान है, लेकिन राम बनना कठिन है। लोग जब किसी दूसरे के बेटे द्वारा किए गए अपराध पर कठोर सजा की मांग करते हैं, तो वही लोग अपने घर की संतान से गलती होने पर उसे बचाने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर ऐसा संकल्प लेना चाहिए कि गलत करने वाला अपना हो या पराया, अपराध के प्रति दृष्टिकोण समान रहेगा और अपनी संतान के लिए भी वही दंड स्वीकार किया जाएगा, जिसकी मांग दूसरों के लिए की जाती है।
पिच्छिका पर बांधा रक्षासूत्र, लिया मुनि-रक्षा का संकल्प
प्रवचन के समापन पर श्रद्धालुओं ने आचार्य ससंघ की पिच्छिका पर रक्षासूत्र बांधकर मुनि-रक्षा का संकल्प लिया। रक्षाबंधन के अवसर पर शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में भी बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं परिवार सहित पहुंचे। श्रद्धालु दीपक और श्रीफल के साथ राखियां लेकर आए और आचार्य ससंघ का आशीर्वाद प्राप्त किया।
संगीत और आरती के साथ रक्षाबंधन उत्सव भक्तिभाव से मनाया गया। ज्ञान गंगा महोत्सव के अंतर्गत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8:30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में पुलकसागर महाराज के प्रवचन जारी रहेंगे।
संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312






