जन्म, मृत्यु और वैराग्य किसी मुहूर्त के मोहताज नहीं, शुभ कार्य को कल पर न टालें : अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी
‘मन, सांस और पुण्य’ पर कभी न करें अंधा भरोसा, अच्छे विचार आएं तो तुरंत करें अमल
पुष्पगिरी।
जीवन कब करवट बदल ले, इसका किसी को पता नहीं। जन्म कब होगा, मृत्यु कब आएगी और वैराग्य का भाव कब जाग उठेगा—इनका कोई निश्चित मुहूर्त नहीं होता। इसलिए जीवन में आने वाले शुभ विचारों और अच्छे अवसरों को टालना नहीं चाहिए। यह प्रेरणादायी संदेश अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ने विशाल धर्मसभा में गुरुभक्तों को संबोधित करते हुए दिया।
आचार्य श्री ने जीवन के गहरे आध्यात्मिक रहस्य को समझाते हुए कहा कि गृह प्रवेश का मुहूर्त होता है, लेकिन गृह त्याग अर्थात वैराग्य का कोई मुहूर्त नहीं होता। जन्म, मृत्यु और वैराग्य तीनों ही किसी पंचांग या मुहूर्त के अधीन नहीं हैं। जन्म लेने वाला शिशु मुहूर्त देखकर संसार में नहीं आता और मृत्यु भी किसी शुभ-अशुभ समय को देखकर नहीं आती।
ज्योतिषी का प्रसंग सुनाकर समझाया—जीवन का कोई भरोसा नहीं
आचार्य श्री ने एक रोचक प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन की अनिश्चितता का एहसास कराया। उन्होंने बताया कि अयोध्या के एक प्रसिद्ध ज्योतिषी ने स्वयं अपने निधन की तारीख और समय की घोषणा कर दी थी। जैसे-जैसे वह निर्धारित समय नजदीक आया, देशभर का मीडिया अयोध्या पहुंच गया।
मृत्यु के निर्धारित समय से केवल 30 मिनट पहले तक लोग उत्सुकता से प्रतीक्षा करते रहे। समय बीत गया, लेकिन ज्योतिषी जीवित रहे और लोगों की कुण्डलियां देखते रहे।
इस प्रसंग के माध्यम से आचार्य श्री ने कहा कि जीवन का कोई भरोसा नहीं है। इसलिए भविष्य के भरोसे बैठकर वर्तमान के शुभ कार्यों को टालना समझदारी नहीं है।
इन तीन चीजों पर कभी न करें अंधा भरोसा
अंतर्मना आचार्य श्री ने श्रद्धालुओं को सावधान करते हुए कहा कि जीवन में तीन चीजों पर कभी भी अंधा भरोसा नहीं करना चाहिए—
मन, सांस और पुण्य।
मन कब बदल जाए, सांस कब थम जाए और पुण्य कब समाप्त हो जाए—कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए जब भी मन में कोई शुभ विचार आए, उसे केवल विचार बनाकर न छोड़ें, बल्कि तत्काल उसे जीवन में उतारने का प्रयास करें।
अच्छे विचारों की ‘भ्रूण हत्या’ न होने दें
आचार्य श्री ने मर्मस्पर्शी संदेश देते हुए कहा कि अच्छे विचार मन में बार-बार नहीं आते। यदि कोई श्रेष्ठ विचार आया और उसे यह सोचकर टाल दिया कि इसे कल करेंगे, तो संभव है कि वह विचार फिर कभी आए ही नहीं।
उन्होंने कहा कि शुभ विचारों को टालना, उनकी ‘भ्रूण हत्या’ करने जैसा है। समझदार व्यक्ति वही है जो शुभ कार्य को आज, अभी और इसी क्षण पूरा करने का प्रयास करे, जबकि पाप कर्म को कल पर टाल दे।
आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के लिए संकल्प जरूरी है। उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान करते हुए कहा कि हर रात सोने से पहले ऐसा संकल्प जरूर लें, जो आपको सुबह उठकर उसे पूरा करने के लिए प्रेरित करे।
आचार्य श्री के इस संदेश ने धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन की क्षणभंगुरता के साथ-साथ वर्तमान समय के सदुपयोग और शुभ कार्यों को तत्काल करने की प्रेरणा दी।
प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा एवं पीयूष कासलीवाल (औरंगाबाद) से प्राप्त जानकारी।
संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
मोबाइल : 9929747312







