पल पल रंग बदलती है दुनिया और लोग पूछते है होली कब है? नफरत और घृणा को बाहर निकालकर प्रेम करो। प्रसन्न सागर महाराज
अहिक्षेत्र पारसनाथ
परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने होली का अर्थ समझाते हुए कहां की नफरत,द्वेष, क्लेश और संक्लेश की होली जलाकर, प्रेम का ऐसा रंग भरो जिसके छीटों में बस — प्यार ही प्यार हो। सबको जोड़ने की ताकत, सिर्फ और सिर्फ प्रेम में है और सबको तोड़ने की ताकत भ्रम में है। इसलिए कभी भी मन में भ्रम को न पलने दो क्योंकि हर किसी को, हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं है। बहुत बार, बहुत सी जगह पर खामोश रहना पड़ता है और दिल को बड़ा करना पड़ता है।
कुछ चीजें रिश्तों को बचाने के लिये, नजर अंदाज करना पड़ता है। हर कोई आपको समझ नहीं सकता है और हर किसी को आप समझा नहीं सकते हैं।इसलिए — एक घन्टे की खुशी चाहिए तो बेहतर होगा आप एक झपकी नींद ले लें।
एक दिन की खुशी चाहिए तो प्रोग्राम बनाओ और पिकनिक पर निकल जाओ।
एक महिने की खुशी चाहिए तो आज ही शादी कर डालिये। एक साल की खुशी चाहिए तो टाटा बिड़ला जितनी सम्पत्ति कमा लीजिये, औरजिन्दगी भर की खुशी चाहिए तो — आज से मेरी भावना पढ़ना शुरू कर दीजिये।धर्म और अध्यात्म का दामन थाम लीजिये, क्योंकि जो हर हाल में मस्त रहता है, वो कभी तनाव ग्रस्त नहीं रहता। 
महाराज श्री ने मंगल कामना करते हुए कहा कि होली के त्योहार पर, मैं परमात्मा से प्रार्थना करता हूँ कि आपके सारे दु:ख दर्द, होली में जल जाये और रंग पंचमी को सुख, शान्ति, समृद्धि, ऐश्वर्य, प्रेम, आनन्द के रंग – आपके जीवन को खुशियों से भर जाये…!!!

उन्होंने होली का अर्थ भी समझाया
होली का अर्थ है —
H — Hate (घृणा)
O — Out (बाहर)
L — Love (प्रेम)
I — In भीतर 
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
