कुदृष्टि से बचें, दूसरों की खुशी में अपनी खुशी खोजें : मुनिश्री सुधासागर जी

धर्म

कुदृष्टि से बचें, दूसरों की खुशी में अपनी खुशी खोजें : मुनिश्री सुधासागर जी

इंदौर।

श्रमण संस्कृति के महाश्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने गुरुवार को दलाल बाग स्थित देशना मंडप में धर्मसभा को संबोधित करते हुए जीवन को पवित्र, संयमित और संस्कारवान बनाने का संदेश दिया।

 

 

 

मुनिश्री ने कहा कि जो व्यक्ति मन, वचन और काया से पवित्र है, उस पर कभी कुदृष्टि नहीं डालनी चाहिए। रावण ने माता सीता पर कुदृष्टि डालकर उन्हें अपने वश में करने का प्रयास किया था। इसी अधर्म के प्रतीक के रूप में आज भी प्रतिवर्ष दशहरे पर रावण का दहन किया जाता है।

 

 

दूसरों की खुशी देखकर ईर्ष्या नहीं, प्रसन्नता हो

मुनिश्री ने कहा कि दुनिया में बड़ी संख्या में लोग दूसरों की खुशी और तरक्की देखकर ईर्ष्या करने लगते हैं। उन्होंने संदेश दिया कि बड़े और सफल लोगों की उन्नति देखकर जलना नहीं चाहिए और न ही उन्हें कभी बद्दुआ देनी चाहिए। जो व्यक्ति दूसरों की खुशी में खुश होता है, वही वास्तव में श्रेष्ठ और विनम्र कहलाता है।

बेटे को ऐसे संस्कार दें कि वह मुनि बने

नारी शक्ति को प्रेरणा देते हुए मुनिश्री ने कहा कि यदि कोई नारी स्त्री पर्याय से मुक्ति की भावना रखती है तो वह यह संकल्प ले सकती है कि भले ही वह स्वयं मुनि न बन सके, लेकिन अपने एक बेटे को ऐसे संस्कार जरूर देगी कि वह आगे चलकर मुनि बने।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को मुनि बनने की प्रेरणा उनकी माता श्रीमंती जी से ही मिली थी। संस्कारों की शक्ति को समझाते हुए उन्होंने कहा कि माता की भूमिका संतान के जीवन निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

दूसरों को पतन की ओर ले जाने वाले सबसे बड़े पापी

मुनिश्री ने कहा कि भ्रष्ट और पतित लोगों से भी ज्यादा खतरा उन लोगों से है, जो स्वयं पतित, पापी और भ्रष्ट होकर दूसरों को भी उसी राह पर ले जाने का प्रयास करते हैं। ऐसे व्यक्ति केवल स्वयं का जीवन खराब नहीं करते, बल्कि दूसरों के जीवन को भी पतन की ओर धकेलते हैं। ऐसे लोग महापापी कहलाते हैं।

रक्षाबंधन पर युवतियों से लिया अनूठा संकल्प

रक्षाबंधन की पूर्व बेला पर मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने युवतियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे ऐसा भाई चुनें जो धार्मिक संस्कारों को अपने जीवन का हिस्सा बनाए।

उन्होंने प्रेरणा दी कि जो भाई प्रतिदिन देवदर्शन, अभिषेक और पूजन का नियम लेगा, उसी भाई की कलाई पर राखी बांधने का संकल्प लिया जाए। इससे रक्षाबंधन का पर्व केवल भाई-बहन के प्रेम तक सीमित न रहकर धर्म, संस्कार और आत्मकल्याण का पर्व भी बनेगा।

— राजेश जैन दद्दू, इंदौर

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट
संपर्क : 9929747312

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