विकृति का दुष्प्रभाव शरीर की नियमित और स्वस्थ प्रक्रिया पर अवश्य पड़ता है भावसागर महाराज
गौरझामर
परम पूज्य आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज की परम शिष्य मुनि श्री विमल सागर महाराज संघ का बुधवार की बेला में गौरझामर से सागर की ओर हुआ 26 जून को रात्रि विश्राम बरकोटी के समीप हुआ।
इससे पूर्व गौरझामर में धर्म सभा में पूज्य मुनि श्री विमल सागर महाराज ने कहा कि मृत्यु डर कर भाग जाती है, जो मृत्यु से डरता नहीं है। कर्मों को नष्ट करके अजर अमर बनना चाहिए। चाह ही संसार में दाह का कारण बनती है, जिसे कुछ नहीं चाहिए वह शहंशाह होता है। स्वर्ग के द्वारा खोले जाते हैं, अच्छे व्रत नियम से यह जड़ से दुखों को नष्ट कर देती है।

पूज्य मुनि श्री भावसागर महाराज ने दुर्भावना पर शरीर पर क्या विशेष प्रभाव पड़ता है यह बताया उन्होंने कहा कि दुर्भावना का शरीर पर विशेष प्रभाव पड़ता है। अपने स्वरूप में मानव मन जितना पावन होता है, उतना ही इस मन में दुर्भावना का गहरा प्रभाव भी प्राय हो जाता है।
उन्होंने कहा कि जिनसे मन विकृत होता है, इस मन विकृति का दुष्प्रभाव शरीर की नियमित और स्वस्थ प्रक्रिया पर अवश्य ही पड़ता है। वर्तमान युग वैज्ञानिक होने के कारण अब उन तथ्यों की गहराई तक पहुंचाना संभव हो सका है, जिससे मन की दुर्भावनाओं का शरीर की प्रक्रिया पर पड़ा हुआ दुष्प्रभाव और उनके कारणों को स्पष्ट किया जा सकता है। अनेक वैज्ञानिक शोधों: के उपरांत यह प्रमाणित हुआ है कि घृणा, ईर्ष्या, बेईमानी, चिंता, कंजूसी, अकड़, प्रमाद और अहम का मानव हार्मोस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जिसमें अनेक प्रकार की बीमारियां भी शरीर पर अपना कब्जा कर लेती हैं। किस दुर्भावना का कौन से हार्मोस पर प्रभाव पड़ता है और उससे यह बीमारी हो सकती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी ,9929747312
