जिंदगी में कुछ चीजें बनाने में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन मिटाने में सिर्फ एक पल: अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

धर्म

जिंदगी में कुछ चीजें बनाने में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन मिटाने में सिर्फ एक पल: अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

 

पुष्पगिरी सोनकच्छ।

जीवन में कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिन्हें बनाने में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन उन्हें मिटाने में केवल एक पल लगता है। रिश्ते हों, विश्वास हो, प्रतिष्ठा हो या जीवन की कोई उपलब्धि—इनके निर्माण में समय और धैर्य लगता है, जबकि इन्हें नष्ट करने में क्षण भर ही पर्याप्त होता है। यह प्रेरक संदेश पट्टाचार्य अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज ने पुष्पगिरी सोनकच्छ में गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए दिया।

 

आचार्य श्री ने जीवन की वास्तविकता को सहज उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए कहा कि Delete जितनी तेजी से होता है, उतनी तेजी से Download नहीं होता। क्योंकि बनने में वक्त लगता है और मिटने में नहीं। सर्जन में समय लगता है, विसर्जन में नहीं। यही बात किसी Application पर लागू होती है और यही किसी रिश्ते पर भी।

 

उन्होंने कहा कि व्यक्ति को स्वयं से परेशान होकर स्वयं से झगड़ा नहीं करना चाहिए। जोश में आकर अपना नुकसान नहीं करना चाहिए और दूसरों पर दोषारोपण करने से केवल नकारात्मकता फैलती है। अनावश्यक कार्यों से स्वयं को दूर रखते हुए विनम्रता अपनानी चाहिए, क्योंकि झुककर और हाथ जोड़कर ही व्यक्ति बेहतर इंसान बन सकता है।

 

आचार्य श्री ने जीवन की व्यवहारिक सच्चाइयों पर भी ध्यान दिलाते हुए कहा कि “बटर लगाने वाले के हाथ में चाकू होता है।” सहयोग मांगने पर कई बार लोग बातें सुनाते हैं और आपकी बात पता चल जाने पर उसका मजाक भी बना सकते हैं। इसलिए अपने जख्म हर किसी को बताने के बजाय विवेक और संयम से काम लेना चाहिए, क्योंकि कई लोग अवसर का फायदा उठाने से भी नहीं चूकते।

 

गलती हम करते हैं, सबक हमें मिलता है… फिर वही गलती दोहरा देते हैं

 

आचार्य श्री ने जीवन को समय के चक्र से जोड़ते हुए कहा कि मनुष्य अक्सर अपनी गलतियों से सीखता तो है, लेकिन कुछ समय बाद फिर उसी गलती को दोहरा देता है।

 

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि व्यक्ति भजिया, बड़ा, समोसा और कचौड़ी खाकर बीमार पड़ता है। अस्पताल पहुंचने के बाद स्वास्थ्य लाभ के लिए संतरा, मौसमी और सेब खाने लगता है। परंतु जैसे ही ठीक होकर अस्पताल से बाहर निकलता है, सबसे पहले सड़क किनारे खड़े होकर फिर वही भजिया, समोसा, बड़ा और कचौड़ी खाने लगता है। यही जीवन का चक्र है—गलती हम करते हैं, सबक हमें मिलता है, कुछ समय सुधारते हैं और फिर वही गलती दोहरा देते हैं।

 

पैसा कमाने के लिए स्वास्थ्य खोया, फिर स्वास्थ्य पाने में पैसा खोया

 

आचार्य श्री ने आज की जीवनशैली पर चिंतन कराते हुए कहा कि इंसान पैसा कमाने के लिए दिन-रात मेहनत करता है और इसी दौड़ में अपने शरीर और स्वास्थ्य को बिगाड़ लेता है। जब शरीर जवाब देने लगता है तो उसे ठीक करने के लिए वही कमाया हुआ पैसा खर्च करना पड़ता है।

 

उन्होंने कहा कि जिस शरीर के लिए धन कमाया, उसी शरीर को समय नहीं दिया। जिस परिवार के लिए दौलत जुटाई, उसी परिवार के साथ बैठने का वक्त नहीं निकाला। जिस सुख के लिए पूरी जिंदगी दौड़ते रहे, वही सुख कहीं रास्ते में छूट गया।

 

उन्होंने गुरु भक्तों से आह्वान किया कि जीवन को केवल कमाने की मशीन न बनाएं। थोड़ा कमाएं, थोड़ा बचाएं, थोड़ा बांटें, थोड़ा मुस्कुराएं और सबसे जरूरी—अपने लिए, अपनों के लिए तथा अपने शरीर के लिए समय जरूर निकालें।

 

“जिंदगी दोबारा Download नहीं होती…”

 

आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में बीता हुआ समय वापस नहीं आता। इसलिए हर पल की कीमत समझना जरूरी है।

 

“जिंदगी दोबारा Download नहीं होती,

समय दोबारा Install नहीं होता,

और जो पल Delete हो गया, वह कभी Restore नहीं होता।”

 

उन्होंने कहा कि जीवन को केवल गुजारने के बजाय उसे सार्थक ढंग से जीना सीखिए। समय, स्वास्थ्य, रिश्ते और परिवार—इनकी कीमत समझकर वर्तमान में जीना ही वास्तविक जीवन की कला है।

 

प्रचार-प्रसार संयोजक: नरेंद्र अजमेरा एवं पीयूष कासलीवाल, औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी एवं संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी

मो.: 9929747312

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