पुष्पगिरी तीर्थ में गूंजा संत समागम का दिव्य संदेश: अंतर्मना प्रसन्न सागर महाराज को मिला ‘व्रत चक्रवर्ती’ का पट्ट विभूषण
पुष्पगिरी
पुष्पगिरी तीर्थ।
अनादि-अनंत काल से चली आ रही वीतराग आदिनाथ की दिव्य परंपरा में जब तप, त्याग, संयम, मौन साधना और आत्मानुभूति का तेज धरती पर प्रकट होता है, तब संतों का ऐसा समागम स्वयं में एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक अवसर बन जाता है। पुष्पगिरी तीर्थ पर आयोजित गणाधिपति गणाचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर जी महाराज के पट्ट विभूषण संस्कार महोत्सव के दूसरे दिन देशभर से पहुंचे संतों और श्रद्धालुओं के बीच ऐसा ही अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
महोत्सव के दौरान गणाधिपति गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज ने अंतर्मना प्रसन्न सागर जी महाराज को ‘व्रत चक्रवर्ती’ की उपाधि से विभूषित करते हुए कहा कि उनका तप मेरु पर्वत से भी ऊंचा, मौन महासागर से भी गहरा और आत्मतेज सूर्य से भी अधिक प्रकाशमान है। उन्होंने कहा कि ऐसे महातपस्वी साधक का दर्शन और सान्निध्य मिलना स्वयं में सौभाग्य है।

गणाचार्य श्री ने कहा कि “आपकी करुणा गंगा से भी अधिक पवित्र और आपका वैराग्य आकाश से भी अधिक उन्नत है। आपकी गुरु-भक्ति जिनागम और जिनशासन के प्रति चिर प्रेरणा बनी रहे।”
उन्होंने कहा कि विज्ञान मनुष्य को पदार्थ के पास ले जाता है, जबकि धर्म उसे परमात्मा के निकट ले जाता है। अंतर्मना प्रसन्न सागर महाराज की तप-साधना और आत्मलीनता को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशंसा की अपेक्षा नहीं, बल्कि साधक का स्वयं उस ऊंचाई तक पहुंचना ही सबसे बड़ा पुण्य है।
इसी अवसर पर गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज ने अंतर्मना प्रसन्न सागर जी महाराज को नई पहचान देते हुए घोषणा की—अब वे ‘व्रत चक्रवर्ती पट्ट भूषण अंतर्मना प्रसन्न सागर जी महाराज’ के नाम से विभूषित होंगे।
देश के दिग्गज संतों की मौजूदगी में भव्य शुभारंभ
पुष्पगिरी तीर्थ के पट्ट विभूषण अभिषेक अनुमोदना उत्सव में योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज, आचार्य बालकृष्ण जी, अंतरराष्ट्रीय शिवकथा वाचक पं. प्रदीप मिश्रा, पूज्य महेश गुरु जी, महामंडलेश्वर प्रेमानंद पुरी जी, बाबा सत्यनारायण मौर्य, विधायक डॉ. राजेश सोनकर, मोटिवेशनल स्पीकर उज्ज्वल पाटनी सहित देशभर के अनेक संत एवं विशिष्टजन उपस्थित रहे।
दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मंगलाचरण मुनि नेगम सागर जी महाराज ने किया, जबकि ऋतु जैन ने मंगलाचरण नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी।
अंतर्मना प्रसन्न सागर ने संतों को अपने अंदाज में किया नमन
पट्ट विभूषण से विभूषित अंतर्मना प्रसन्न सागर जी महाराज ने अपने संबोधन में संतों और विशिष्ट अतिथियों का भावपूर्ण अभिनंदन किया। उन्होंने योगगुरु बाबा रामदेव के योगदान को नमन करते हुए कहा—
“बुझा था, जला दिया; दूर था, पास बुला लिया। वाह रामदेव स्वामी जी! देश सोया था, आपने जगा दिया।”
उन्होंने कहा कि गुरुदेव स्वामी रामदेव जी के पास भले व्यक्ति कम हों, लेकिन कमजोर एक भी नहीं है। उन्होंने योग के माध्यम से मानव कल्याण का बड़ा कार्य किया है।
पं. प्रदीप मिश्रा द्वारा शिवकथा के माध्यम से लोगों को धर्म से जोड़ने और आचार्य बालकृष्ण द्वारा आयुर्वेद को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के प्रयासों की भी उन्होंने सराहना की।

अपने गुरु गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि उनके शिष्यों—तरुण सागर, प्रज्ञा सागर, पुलक सागर, प्रणाम सागर, अरुण सागर, प्रमुख सागर सहित अनेक संतों ने देश-दुनिया में धर्म का प्रभाव बढ़ाया है।
बाबा रामदेव बोले—“चक्रवर्ती राजा तो सुने थे, चक्रवर्ती साधु पहली बार देखा”
योगगुरु बाबा रामदेव ने कहा कि शरीर के आवरण अलग-अलग दिखाई देते हैं, लेकिन भीतर आत्मतत्व एक ही है और धर्म का तत्व भी एक है। जिसने इस एकत्व को समझ लिया, वह सही मार्ग पर चल सकता है।
उन्होंने कहा कि यह अनुष्ठान धन्य है। गुरुदेव ने जिन्हें अपने उत्तराधिकारी के रूप में चुना है, उनके तप और साधना का देश साक्षी बना है।
बाबा रामदेव ने कहा—
“हमने चक्रवर्ती राजा तो सुने थे, लेकिन चक्रवर्ती साधु पहली बार देखा है।”
उन्होंने अंतर्मना प्रसन्न सागर जी महाराज के सैकड़ों दिनों के उपवास और कठोर तप-साधना का उल्लेख करते हुए कहा कि इतने संतों के बीच इस ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बनना उनके लिए सौभाग्य है।
पं. प्रदीप मिश्रा बोले—संतों के बराबर कोई चक्रवर्ती नहीं
अंतरराष्ट्रीय शिवकथा वाचक पं. प्रदीप मिश्रा ने आयोजन को दिव्य और भव्य बताते हुए कहा कि संत, मुनि और साधुओं के बराबर कोई चक्रवर्ती हो ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि गुरुदेव द्वारा दी गई ‘व्रत चक्रवर्ती’ की उपाधि अत्यंत सुंदर और सार्थक है।
आचार्य बालकृष्ण बोले—ये सामान्य दिन नहीं, संस्कृति के जीवंत दर्शन हैं
आचार्य बालकृष्ण स्वामी ने कहा कि ये सामान्य दिन नहीं, बल्कि अत्यंत पावन दिन हैं। यह आयोजन भारतीय संस्कृति के जीवंत स्वरूप के दर्शन करा रहा है।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म में गुरु के दर्शन तीर्थ के समान माने गए हैं और ऐसे संतों का आशीर्वाद प्राप्त होना सभी के लिए सौभाग्य की बात है।
बाबा सत्यनारायण मौर्य बोले—महावीर का तप भी जैसे प्रसन्न सागर बनकर लौटा
बाबा सत्यनारायण मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि “उपवासों से जब महावीर का मन नहीं भर पाया, इसीलिए प्रसन्न सागर बनकर इस धरती पर आए।” उनके इस कथन ने उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच विशेष भाव पैदा किया।
पुष्पगिरी तीर्थ में बनेगा विशाल पतंजलि वेलनेस सेंटर
महोत्सव के दौरान योगऋषि बाबा रामदेव ने पुष्पगिरी तीर्थ के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि तीर्थ परिसर में भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालय, दक्षता एवं कुशलता केंद्र तथा विशाल आधुनिक पतंजलि वेलनेस सेंटर विकसित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि वेलनेस सेंटर में बीमारी के इलाज के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य, रोगों की रोकथाम और शारीरिक-मानसिक संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यहां योग, ध्यान, प्राकृतिक चिकित्सा, पोषण संबंधी सलाह और तनावमुक्ति जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
संतों ने प्रदान किया ‘युगप्रधान दिव्यावदान’ आलेख
आयोजन प्रवक्ता रोमिल जैन ने बताया कि देश के प्रख्यात संतों ने गणाधिपति गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज को ‘युगप्रधान दिव्यावदान’ आलेख प्रदान किया।
इस अवसर पर हिंदी साहित्यकार डॉ. नलिन शास्त्री की पुस्तक ‘अंकलीकर परंपरा पट्टाचार्य गौरवम्’ का विमोचन भी किया गया।
गुरुदेव ने भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन एनपी सिंह, आस्था चैनल के सीईओ प्रमोद जोशी, संस्कार चैनल के सीईओ मनोज त्यागी तथा पतंजलि योगपीठ के प्रवक्ता एसकेजी तिजारावाला का शब्दों से सम्मान करते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।
गुरु-शिष्य भक्ति का दिखा अद्भुत दृश्य
पट्ट विभूषण से विभूषित होने के बाद पहली बार गुरु भक्तों ने गुरु-शिष्य के चरण प्रक्षालन कर पुण्यार्जन किया। इसके बाद गणाधिपति गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज की अष्टद्रव्य से विधिवत पूजा-अर्चना की गई। भक्तों ने भक्ति नृत्य और जयघोष के बीच गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम में अंतर्मना ट्रस्ट अध्यक्ष शांतिलाल बेलावत, तीर्थ अध्यक्ष प्रकाश अजमेरा, सुभाष जैन, संघपति दिलीप हुमड़, संयोजक प्रशांत गंगवाल, विधायक डॉ. राजेश सोनकर, जैन समाज अध्यक्ष महेन्द्र पाटोदी, सुभाष चूड़ीवाल, नवीन शास्त्री, एसकेजी तिजारावाला, उज्ज्वल पाटनी, अशोक दोशी, डॉ. संजय जैन, विवेक आलोक गंगवाल, संजीव जैन कोलकाता, रजत झांझरी इंदौर, आयुष जैन भोपाल, नीरज गंगवाल राजिम, राजेश पाटनी, सुरेश पंड्या दिल्ली, अरुण ब्लैक डायमंड दिल्ली, सनत कुबेर बांसवाड़ा, अनिल जैन बेंगलुरु, प्रीतेश जैन जयपुर सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मंच संचालन मुनि पीयूष सागर जी महाराज ने किया, जबकि आभार तीर्थ अध्यक्ष ने व्यक्त किया।
प्रचार-प्रसार संयोजक: रोमिल पाटणी, सोनकच्छ | नरेंद्र अजमेरा एवं पीयूष कासलीवाल, औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312
