गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी संसघ का जनकपुरी जैन मन्दिर में हुआ भव्य मंगल प्रवेश
हर व्यक्ति ऊर्जा का केंद्र है गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी जयपुर

जनकपुरी-ज्योतिनगर में आज गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी संसघ का गाजे बाजे एवं जुलुस के साथ मंगल भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जैन महासभा के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने इस कार्यक्रम में शिरकत करते हुए बताया कि आर्यिका श्री का भव्यता के ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ मन्दिर समिति प्रबन्धकारिणी कमेटी के अध्यक्ष पदम बिलाला ने बताया कि आज गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी संसघ प्रातः 8.30 बजे ज्योतिनगर स्थित आदिनाथ चैत्यालय से जनकपुरी नगर प्रथम होता हुआ

जनकपुरी जैन मन्दिर पहुॅचा। पूरे रास्ते में जनकपुरी ज्योतिनगर के श्रद्धालुओ ने पाद प्रक्षालन और आरती की। कार्यक्रम में महिला मण्डल इन्द्राणियों का स्वरूप धारण किए, हाथों में मंगल कलश लिए, वन्दामी करते हुए, जयकारा लगाते हुए चल रहे थे। जनकपुरी मन्दिर पहुॅचने पर द्वार पर सामूहिक रूप से मंगल कलशों के साथ महिलाओं ने मंगल गीत गाते हुए आरती कर मंदिर जी में प्रवेश कराया तत्पश्चात कार्यक्रम में भगवान मुनिसुव्रतनाथ भगवान के चित्र का अनावरण किया रमेश जी साखुणिया परिवार ने, दीप प्रज्ज्वलन किया राजेश गंगवाल परिवार ने, मंगलाचरण किया किरन जैन ने, तथा भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया महिला मण्डल की प्रिया, मीनाक्षी व प्रेरणा के साथ रिया व नमिषा काला ने,पाद प्रक्षालन किया अजय कुमार जैन परिवार व कैलाश ठोलिया परिवार ने,शास्त्र भेंट किया पदम बिलाला परिवार ने, इनके साथ ही सुनील सेठी एवं केवल चन्द गोधा परिवार ने भी शास्त्र भेंट किया। जयपुर जैन समाज के सभी मन्दिरोें से आए प्रमुख पदाधिकारियों का अभिनन्दन किया गया।समारोह के मुख्य अतिथि समाजसेवी ज्ञानचन्द जैन ने आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के व्यक्तित्व ओैर उनकी शिक्षाओं पर प्रकाश डाला और माननीय राज्यपाल महोदय की ओर से राजभवन आने के लिए श्रीफल भेंट किया। आर्यिका श्री ने सभी धर्म सभा में श्रृद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि हर व्यक्ति ऊर्जा का केन्द्र है धर्म से सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है यह उसके सकारात्मक विचारों पर निर्भर है। बुराई इसलिए समाज में है क्योंकि अच्छे लोेग चुप है, संसार में हर तरह के लोग है। धर्म से शान्ति मिलती है धर्म अनेक प्रकार से होता है लेकिन धर्म से शक्ति उन्हें ही मिलती है जो मन-वचन-काय से ध्यान करते हुए परमात्मा से जुडते है। माताजी ने कहा की जो परमात्मा का भूत है वो हमारा वर्तमान है। मनुष्य पुरूषार्थ कर अपना भविष्य बना सकता है। मनुष्य परमात्मा का ध्यान लगाते हुए मन वचन काय से धर्म करता है तोे उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आता है। जनकपुरी जैन मन्दिर प्रबन्ध कमेटी के अध्यक्ष पदम बिलाला ने बताया कि दोपहर मेें 3 बजे भक्तामर दीप अर्चना और सायंकाल महाआरती और धार्मिक नाटिका प्रस्तुत की गयी। कार्यक्रम में राकेश जैन
प्रचार प्रसार प्रभारी सहित सकल दिगंबर जैन समाज मौजूद था।
*राजाबाबू गोधा जैन महासभा मीडिया प्रवक्ता राजस्थान*
