“जो करना है, आज कर लो” — आचार्य श्री सुनीलसागरजी का प्रेरक संदेश
गुरुदेव के चरणों में उमड़ा श्रद्धाभाव, विधान-महायज्ञ में हजारों श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ
इंदौर।
नेमीनगर जैन कॉलोनी में आचार्य श्री 108 सुनीलसागरजी गुरुदेव के सान्निध्य में आयोजित धार्मिक आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आत्मकल्याण की भावनाओं से सराबोर रहा। मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर गुरुदेव को जिनवाणी भेंट की गई तथा आचार्य श्री 108 विशुद्धसागरजी के संघस्थ छह भैयाजी ने गुरुदेव का पादप्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। ये भैयाजी आगामी दिनों में आचार्य श्री विशुद्धसागरजी से दीक्षा ग्रहण करने वाले हैं।
गुरुदेव के चरणों में उमड़ा श्रद्धाभाव
कार्यक्रम में मोटिवेशनल स्पीकर उज्ज्वल पाटनीजी ने भी आचार्य श्री के चरणों में नमन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को सकारात्मक जीवन का संदेश देते हुए कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारे पास परिवार, घर और अन्न जैसी अनमोल नेमतें हैं। प्रत्येक नई सुबह को ईश्वर का उपहार मानते हुए उसके लिए धन्यवाद देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति जितना सकारात्मक रहता है, उसका आभामंडल भी उतना ही सकारात्मक होता है और उसके आसपास रहने वाले लोग भी उस सकारात्मक ऊर्जा को महसूस करते हैं।
आचार्य श्री का संदेश—“जो करना है, आज ही कर लो”
अपने उद्बोधन में आचार्य श्री 108 सुनीलसागरजी ने जीवन की अनिश्चितता और अच्छे कर्मों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केवल श्रद्धा या ज्ञान से जीवन का कल्याण नहीं होता। श्रद्धा के साथ ज्ञान, ज्ञान के साथ चरित्र और चरित्र के साथ तप हो, तभी जीवन वास्तविक रूप से सार्थक बनता है।
गुरुदेव ने कहा कि जीवन कब समाप्त हो जाए, इसका किसी को पता नहीं, इसलिए अच्छे कार्यों को कल पर नहीं टालना चाहिए।
“जो करना है, आज कर लो… अच्छे कर्म आज ही कर लो।”
युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि कर्म कभी धोखा नहीं देते। युवा अवस्था जीवन को दिशा देने का सबसे महत्वपूर्ण समय है। इसलिए इसी अवस्था में धर्म-ध्यान, पूजा, संयम और आत्मकल्याण के कार्यों को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
आत्मावलोकन की प्रेरणा देते हुए गुरुदेव ने कहा—
“झांक रहे हम सबके आंगन, अपना आंगन झांके कौन?
ढूंढ रहे दुनिया में खामी, अपने मन में झांके कौन?”
गुरुदेव के इन शब्दों ने श्रद्धालुओं को स्वयं के भीतर झांकने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा दी।
दीक्षा लेने वाले भैयाजी की हुई गोद भराई
इसके पश्चात आगामी दिनों में आचार्य श्री 108 विशुद्धसागरजी से दीक्षा ग्रहण करने वाले भैयाजी की गोद भराई की रस्म भक्तिभाव एवं मंगल वातावरण में संपन्न हुई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर उन्हें मंगलमय आध्यात्मिक जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।
विधान-महायज्ञ में उमड़ा जनसैलाब
दोपहर 1 बजे तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मतिसागरजी महामंगल विधान, श्री मनोकामना सिद्धि विधान एवं सर्वशांति महायज्ञ का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर धर्मलाभ लिया। मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठानों और भक्ति के वातावरण से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
संध्याकाल में गुरुमुख से शंका समाधान का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। इसके बाद भक्तिभाव से संगीतमय आरती संपन्न हुई।
पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति, गुरु के प्रति समर्पण और आत्मकल्याण की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। आचार्य श्री सुनीलसागरजी के प्रेरक संदेश ने श्रद्धालुओं को यह संकल्प दिया कि अच्छे कार्यों और धर्ममार्ग को कल पर नहीं, बल्कि आज से ही जीवन में उतारना चाहिए।
संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
मो. 9929747312






