आदिनाथ जयंती पर भाव भीनी शुभकामना
प्रथम सूर्य है आदि जिनेश्वर आदिनाथ भगवान
आदिश्वर है ऋषभदेव है जैन धर्म के प्राण
सत्य को खोजा सत्य को जाना सत्य का अनुसधान किया
जैन धर्म के रूप मे जिनवाणी का दान दिया
तेरे बाद ही इस धरती पर 23 तीर्थंकर आए
केवलज्ञान की ज्योति जगाकर पूज्य परम पद को पाए
परिचय
अयोध्या नगर के राजा नाभिराय के उपरान्त आपने अयोध्या का राजपाठ को संभाला . तब कृषि, शिल्प, असि (सैन्य शक्ति ), मसि (परिश्रम), वाणिज्य और विद्या विभागों को बनाकर सम्पूर्ण प्रजा को काम के आधार पर एक जातीय व्यवस्था प्रदान की भगवान् ने भाषा लिपि व लिखने बोलने का सभी को बोध कराया अहिंसा अपरिग्रह की शिक्षा के कारण ही आदिनाथ भगवान से ही जैन धर्म की श्रमण परम्परा का आरभ माना जाता है इतना ही इनके पुत्र भरत के कारण हमारे महान देश का नाम भरत पडा
इनकी स्तुति मात्र करने से काराग्रह के ताले टूट गए
भगवांन आदिनाथ स्तुति मात्र से जन्म जन्मातर के पाप क्षण मे भाग जाते है इसका प्रमाण आगम में मिलता है जब भोजपुर के राजा ने मागतुंगाचार्य मुनिराज को पाप वश काराग्रह मे डाल दिया और 48 तालो और बेडियो से जकड दिया लेकिन आचार्य साधना मे लीन होते भगवान आदिनाथ स्तोत्र भक्तामर लिखने लगे जेसे ही एक काव्य पूर्ण होता एक एक बेडिया ताले टूटते गए 48 काव्य पूर्ण होते ही समस्त बेडिया ताले टूट गए राजा भोज को भी अपराध का बोध हुआ व आचार्य के चरणों मे नतमस्तक हो गया यह महिमा आदिनाथ भगवान् की इन्ही का सन्देश रहा ऋषि बनो या कृषि करो
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
