धर्म को केवल सुनें नहीं, जीवन में उतारें; आचरण ही धर्म की सच्ची पहचान : मुनि श्री योगसागर जी महाराज 20 अगस्त को होगी जैनेश्वरी दीक्षा

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धर्म को केवल सुनें नहीं, जीवन में उतारें; आचरण ही धर्म की सच्ची पहचान : मुनि श्री योगसागर जी महाराज 20 अगस्त को होगी जैनेश्वरी दीक्षा

 

रत्नकरण्ड श्रावकाचार के 20वें श्लोक की व्याख्या में आत्मशुद्धि, संयम और सदाचार का संदेश — “धर्म का प्रभाव व्यवहार में दिखाई देना चाहिए”

 

कोटा, 14 अगस्त।

श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी में परम पूज्य आचार्य भगवन श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य ज्येष्ठ-श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण मुनि शिरोमणि श्री 108 योगसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में चल रही चातुर्मास प्रवचनमाला में शुक्रवार को धर्म, संयम और श्रावक जीवन की सार्थकता पर प्रेरणादायी आध्यात्मिक देशना हुई।

 

मुनि श्री योगसागर जी महाराज ने आचार्य समन्तभद्र स्वामी रचित ‘रत्नकरण्ड श्रावकाचार’ के 20वें श्लोक की गहन व्याख्या करते हुए कहा कि धर्म केवल सुनने, पढ़ने अथवा धार्मिक क्रियाएं करने का विषय नहीं है, बल्कि धर्म का वास्तविक स्वरूप व्यक्ति के विचार, वाणी और व्यवहार में दिखाई देना चाहिए।

 

🌿 धर्म माथे के तिलक तक नहीं, चरित्र की छाप तक पहुंचे

 

मुनि श्री ने कहा कि मंदिर जाना, जिनवाणी सुनना, पूजा-अर्चना करना और धार्मिक अनुष्ठान करना तभी सार्थक है, जब उनका प्रभाव हमारे जीवन और व्यवहार में दिखाई दे।

 

धर्म माथे पर लगाए गए तिलक तक सीमित नहीं, बल्कि चरित्र पर पड़ने वाली अमिट छाप है।

 

उन्होंने कहा कि व्यक्ति के विचार निर्मल हों, वाणी मधुर हो, व्यवहार अहिंसामय हो तथा जीवन में संयम, करुणा और विवेक दिखाई दे—यही धर्म की सच्ची पहचान है।

 

यदि धार्मिक क्रियाएं करने के बाद भी जीवन में क्रोध, मान, माया, लोभ, राग-द्वेष और कटुता बनी हुई है, तो व्यक्ति को दूसरों में दोष देखने के बजाय स्वयं के भीतर आत्ममंथन करना चाहिए।

 

🪷 प्रतिदिन करें आत्ममंथन, यही आत्मशुद्धि की पहली सीढ़ी

 

मुनि श्री योगसागर जी महाराज ने कहा कि भगवान महावीर ने आत्मकल्याण का मार्ग बताया है। इस मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन अपने भीतर झांकना चाहिए।

 

स्वयं से प्रश्न करें—

 

क्या मेरे कारण किसी को दुःख पहुंचा?

क्या मेरे मन में किसी के प्रति द्वेष है?

क्या मेरी वाणी से किसी का हृदय आहत हुआ?

 

उन्होंने कहा कि ऐसा आत्मचिंतन व्यक्ति को अपनी कमियों का बोध कराता है और आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

 

🙏 संसार में रहकर भी संयमित जीवन संभव

 

मुनि श्री ने कहा कि श्रावक जीवन संसार से पलायन का मार्ग नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए मोह-ममता और कषायों पर विजय प्राप्त करने का मार्ग है।

 

परिवार, व्यवसाय और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए भी यदि मनुष्य संयम, मर्यादा, करुणा और विवेक को जीवन का आधार बना ले, तो गृहस्थ जीवन भी आत्मकल्याण का प्रभावी साधन बन सकता है।

 

उन्होंने धर्मावलंबियों से आह्वान किया कि रत्नकरण्ड श्रावकाचार की शिक्षाओं को केवल ग्रंथों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें जीवन का संकल्प बनाएं। जिनवाणी को सुनें भी और जिएं भी।

 

उन्होंने कहा कि अपने भीतर के विकारों को प्रतिदिन कम करना और आत्मा की शुद्धता की ओर आगे बढ़ना ही श्रावक जीवन की वास्तविक पहचान तथा मनुष्य जन्म की सबसे बड़ी सार्थकता है।

 

 

🇮🇳 धर्म, संस्कार और राष्ट्रभक्ति का होगा मंगल संगम

 

15 अगस्त को पुण्योदय नसियां जी में तिरंगा ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान सहित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम

 

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2026 को श्री पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी में धर्म, संस्कार और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

 

प्रातः 8 बजे तिरंगा ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान होगा। इसके पश्चात आचार्य श्री विद्यासागर जैन पाठशाला एवं संत श्री सुधासागर बालिका छात्रावास के बच्चों द्वारा भव्य परेड एवं सलामी दी जाएगी।

 

बालिका छात्रावास की बालिकाओं द्वारा मंगलाचरण तथा श्री विद्यासागर जैन पाठशाला के बच्चों द्वारा ‘भारत की महिमा’ विषय पर सांस्कृतिक प्रस्तुति दी जाएगी।

 

इसके बाद चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, शास्त्र भेंट एवं आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की पूजन-अर्चना होगी। तत्पश्चात पूज्य मुनि श्री के मंगल प्रवचन होंगे। कार्यक्रम के समापन पर मिष्ठान वितरण किया जाएगा।

 

 

🪷 20 अगस्त को होगा भव्य जैनेश्वरी मुनि दीक्षा महोत्सव

क्षुल्लक श्री 105 संयमसागर जी महाराज का जैनेश्वरी मुनि दीक्षा संस्कार मुनि श्री योगसागर जी महाराज के पावन कर-कमलों से

 

संतशिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद तथा विद्याशिरोमणि आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से परम पूज्य क्षुल्लक श्री 105 संयमसागर जी महाराज का जैनेश्वरी दीक्षा संस्कार ज्येष्ठ-श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज के पावन कर-कमलों से संपन्न होगा।

 

दिनांक : 20 अगस्त 2026, गुरुवार

समय : प्रातः 8:00 बजे

स्थान : श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी, कोटा

 

समाजबंधुओं से सपरिवार उपस्थित होकर इस दुर्लभ एवं ऐतिहासिक दीक्षा संस्कार के साक्षी बनने तथा धर्मलाभ एवं पुण्यार्जन करने का आह्वान किया गया है।

 

 

🌸 आज के प्रमुख पुण्यार्जक

 

प्रशासनिक मंत्री श्रीमती अर्चना जैन सर्राफ ने बताया कि आज की शांतिधारा का पुण्यार्जन श्री राजेन्द्र जी, हुकम काका जी, प्रकाश जी परिवार तथा श्रीमती सुशीला जी एवं श्री विवेक ठोरा परिवार द्वारा श्रद्धाभावपूर्वक प्राप्त किया गया।

 

उपाध्यक्ष श्री सुमित जैन एवं श्री मनोज बगड़ा ने बताया कि श्रावक श्रेष्ठी, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट का पुण्यार्जन श्रीमती लाड बाई जी, मनीष जी, अखील जी, नितीका जी, महिता जी एवं समस्त धनोप्या परिवार, कोटा द्वारा श्रद्धाभावपूर्वक किया गया।

 

श्री धर्मचंद धनोप्या एवं श्री दर्शन बरमुंडा ने बताया कि भक्तामर विधान का पुण्यार्जन श्री पुण्योदय भक्तामर मंडल परिवार द्वारा प्राप्त किया गया।

 

श्री अर्पित एवं श्री सुनील माडिया ने बताया कि मुनि श्री योगसागर जी महाराज के आहारदान का सौभाग्य श्री संतोष जी (सी.ए.) एवं श्री मुनीश जी जैठानीवाल परिवार को प्राप्त हुआ।

 

वहीं क्षुल्लक श्री 105 संयमसागर जी महाराज के आहारदान का सौभाग्य श्री कमल जी जैन, बसंत विहार, गणेश तलाव, कोटा परिवार को प्राप्त हुआ।

 

मंगलाचरण का पुण्य अवसर जम्बू कुमारी दोराया द्वारा श्रद्धाभावपूर्वक सम्पन्न किया गया।

 

धर्मसभा के समापन पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभावपूर्वक आचार्य श्री की पूजन-अर्चना, अर्घ्य समर्पण एवं जिनवाणी वंदना कर धर्मलाभ अर्जित किया।

 

🌼 गुरुवाणी का अमृत संदेश

 

“धर्म को केवल सुनना नहीं, अपने जीवन में उतारना ही सच्ची धर्माराधना है। जब विचार, वाणी और व्यवहार में धर्म दिखाई देने लगे, तभी मनुष्य जीवन सार्थक होता है।”

 

संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी

मो. 9929747312

 

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