संयम की ओर बढ़ता एक और मंगल कदम…
कुछ अवसर तारीखों में दर्ज नहीं होते, इतिहास में दर्ज होते हैं।
कुछ आयोजन केवल कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के अध्याय बन जाते हैं। और कोटा की धरती पर 20 अगस्त को होने जा रहा दीक्षा समारोह निश्चित रूप से ऐसा ही एक अवसर बनने जा रहा है।
बड़े ही हर्ष, उल्लास और सौभाग्य की बात है कि क्षुल्लक श्री संयम सागर जी महाराज अब संसार के आकर्षणों से एक कदम और दूर तथा संयम की उस विराट साधना के एक कदम और निकट होने जा रहे हैं, जहाँ जीवन का अर्थ भोग नहीं, बल्कि आत्मकल्याण बन जाता है।
परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद एवं विद्याशिरोमणि आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से यह पावन प्रसंग अपनी गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान कर रहा है।
20 अगस्त, प्रातः 8 बजे से दादाबाड़ी, कोटा में निर्यापक श्रमण मुनि शिरोमणि पूज्य मुनि श्री योगसागर जी महाराज के कर-कमलों से होने जा रहा है भव्य एवं ऐतिहासिक दिगम्बरी जैनेश्वरी दीक्षा समारोह।
और इसके एक दिन पूर्व, 19 अगस्त को दीक्षा पूर्व विधान के साथ वातावरण में वह आध्यात्मिक ऊर्जा दिखाई देगी, जिसका अनुभव शब्दों में नहीं, केवल अनुभूति में किया जा सकता है।
यह कोई सामान्य समारोह नहीं है…
यह त्याग का उत्सव है।
यह तप का अभिनंदन है।
यह संयम का महापर्व है।
यह आत्मा के जागरण का मंगल क्षण है।
राजस्थान के भक्तों में आनंद की लहर है। कमेटी के पदाधिकारियों में उत्साह है। और कोटा की धरती मानो उस ऐतिहासिक क्षण की प्रतीक्षा में स्वयं को सजा रही है।
इस दीक्षा का महत्व इसलिए भी असाधारण है कि आचार्य भगवान की दीक्षा उपरांत यह पहली दीक्षा होगी, जिसे आचार्य महाराज की आज्ञा, भावना और मंगल संकल्प को आगे बढ़ाते हुए निर्यापक श्रमण योगसागर जी महाराज प्रदान करेंगे।
अब कोटा केवल एक शहर नहीं रहेगा…
कोटा एक तीर्थ-सरीखा दृश्य बनेगा।
राजस्थान के कोने-कोने से भक्त पहुँचेंगे।
मध्यप्रदेश से भक्त निकलेंगे।
उत्तरप्रदेश से भी भक्तों में कोटा पहुँचने की होड़ होगी।
क्योंकि सबकी चाहत एक ही होगी—
उस क्षण को अपनी आँखों से देखने की,
जब एक व्यक्ति संसार के मोह को पीछे छोड़कर
संयम के उस राजमार्ग पर कदम रखेगा,
जहाँ मंजिल आत्मकल्याण है।
और सच कहें तो हमारी आँखें केवल संसार की चमक-दमक देखने के लिए नहीं मिलीं…
कभी उन आँखों को भी धन्य करिए,
जो किसी संयमी को संसार से विदा लेकर
संयम की ओर बढ़ते हुए देखें।
क्योंकि आचार्य भगवान की प्रेरणा का सार ही यही है—
यदि हम स्वयं संयम नहीं ले पाए,
तो किसी संयमी की अनुमोदना करके ही
अपने जीवन को धन्य कर लेना समझदारी है।
यही कारण है कि 20 अगस्त का दिन केवल क्षुल्लक श्री संयम सागर जी महाराज का दिन नहीं होगा…
यह हम सबका दिन होगा।
किसी के लिए यह दीक्षा का उत्सव होगा,
किसी के लिए अनुमोदना का पुण्य अवसर,
किसी के लिए आत्मचिंतन का क्षण,
और किसी के लिए शायद अपने पूरे जीवन की दिशा बदल देने वाली प्रेरणा।
कोटा की धरती पर उस दिन केवल एक दीक्षा नहीं होगी…
एक आत्मा संसार की भीड़ से निकलकर
संयम की विराट यात्रा पर अग्रसर होगी।
और जब वह क्षण आएगा, तो हजारों आँखें नम होंगी, हजारों हाथ अनुमोदना में उठेंगे और हजारों हृदयों से एक ही भावना निकलेगी—
धन्य है वह जीवन, जिसने संयम को चुना।
धन्य हैं वे गुरु, जिन्होंने संयम का मार्ग दिखाया।
और धन्य हैं वे श्रावक, जो संयमी की अनुमोदना कर अपने जीवन को भी धन्य बना रहे हैं।
तो आइए…
कोटा चलें।
केवल एक समारोह देखने नहीं,
एक आत्मिक इतिहास का साक्षी बनने।
केवल भीड़ का हिस्सा बनने नहीं,
संयम की उस महायात्रा की अनुमोदना करने।
क्योंकि कुछ दृश्य कैमरे में कैद नहीं होते…
वे जीवन में उतर जाते हैं।
20 अगस्त | प्रातः 8 बजे
दादाबाड़ी, कोटा
एक दीक्षा…
एक ऐतिहासिक क्षण…
एक विराट अनुमोदना…
और हजारों हृदयों में संयम की नई प्रेरणा।
आइए, दीक्षा लेने वाले की अनुमोदना करें।
संयम की आराधना करें।
और अपनी आँखों को भी उस पावन दृश्य का सौभाग्य दें।
॥ त्याग ॥ तप ॥ संयम ॥ आत्मकल्याण ॥
#श्रीश ललितपुर






