तपोभूमि प्रणेता प्रज्ञा सागर महाराज का अपने गुरु पुष्पदंत सागर महाराज से हुआ महामिलन जो गिर कर कभी टूटते नहीं वे कभी सूखते नही प्रज्ञासागर महाराज

धर्म

तपोभूमि प्रणेता प्रज्ञा सागर महाराज का अपने गुरु पुष्पदंत सागर महाराज से हुआ महामिलन
जो गिर कर कभी टूटते नहीं वे कभी सूखते नही प्रज्ञासागर महाराज
पुष्पगिरी
तपोभूमि प्रणेता आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने संघ संहित पुष्पगिरी आकरगुरुदेव पुष्पदंत सागर महाराज के दर्शन किये।
पूज्य  आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने अपने शब्दों में कहा कि कथा कहानियां जीवन का सत्य उद्घाटित करती है।सत्य से परिचय करवाती है।अतः इनका जीवन में बहुत महत्व है।गुरुदेव जो कहानी सुना रहे थे वह कहती है कि गिर जाना लेकिन टूटना मन।क्योंकि जो गिरकर भी टूटते नहीं है, वे कभी सूखते नहीं है।मैं तो दूर रहता हूँ तब भी इन चरणों से जुड़ा होता हूँ। मेरी खुशहाली का कारण ही यही है कि मैं जुड़ा हुआ हूँ।

 

 

पूज्य आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने यह विचार शाम आनंदयात्रा के तहत गुरुदेव के समक्ष व्यक्त किये। उनके पूर्व पूज्य गुरुदेव पुष्पदंत सागर महाराज ने रक कहानी के माध्यम से समझाते हुए कहा-जो जन्म और मृत्यु के बेड़च है वह जीवन है।जीवन का एक सिरा जन्म है तो दूसरा सिरा मृत्यु है।जन्म लेने वाला हर बच्चा मृत्यु के साथ जन्म लेता है।

 

 

 

प्रज्ञा सागर महाराज 13 किलोमीटर चलकर पुष्पगिरी पहुंचे

       
यहाँ उल्लेखनीय है कि सुबह 7 बजे विहार शुरू करके प्रज्ञासागर महाराज 13 किलोमीटर चले और साढ़े नौ बजे पुष्पगिरी पहुंचे।उज्जैन से पुुष्पगिरी तक का पूरा विहार करवााने का दायित्व पलाश लुहाड़िया और सलिल जैन पंंथपिपलई ने निष्ठा के साथ निभाया।
जैसे ही गुरुदेव पुष्पदंत सागर महाराज को को ज्ञात हुआ कि उनका शिष्य निकट आ रहे है। तो वे स्वयं लेने के लिए जिनवाणी लॉं कॉलेज से भी बहुत आगे तक आएँ।
आचार्य गुरुदेव को देखते ही प्रज्ञा सागर महाराज ने उन्हें पिच्छी उठाकर प्रणाम किया।फिर उनके निकट आकर परिक्रमा लगाते हुए उनकी वन्दना की।
यही सचमुच एक विनय संपन्नता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है। उसके बाद जो क्षण देखने को मिले। वे अविस्मरणीय है। फिर गुरुदेव ने गले से लगाकर आत्मीय प्रेम दिया। पहले शिष्य ने गुरु को नमन किया फिर गुरु ने गले लगाकर आशीष दिया। यह बिरले क्षण ही कहे जा सकते हैं, स्वयं गुरु शिष्य को लेने जाता है। हम सभी के समक्ष यह एक अभूतपूर्व उदाहरण है, जो सदा इतिहास के पन्नों पर अमिट रहेगा।
उसके बाद समस्त संघ ने आशीर्वाद प्राप्त किया।इस अवसर पर जिनवाणी लॉ कॉलेज के बच्चे कॉलेज के सामने पुष्प लेकर खड़े थे जिन्होंने पुष्पवृष्टि करते हुए स्वागत किया। फिर चलते हुए पुष्पगिरी पहुंचे।पुष्पगिरी में माँ जिनवाणी स्कूल के बच्चों ने बैंड बजाते हुए पुष्प वर्षा करते हुए स्वागत किया।फिर सभी ने पहले भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी के दर्शन किये।और संत निवास में आएँ।कुछ देर गुरुदेव के साथ बैठने के बाद शुद्धि हेतु गए।शुद्धि करके आहारचर्या के लिए निकले
दोपहर में तत्त्वार्थ सूत्र जी की क्लास यथावत लगी।सभी को दो सूत्रों की व्याख्या करते हुए समझाया और सिखाया।बाद में प्रतिक्रमण हेतु गुरुदेव के पास गए।सामुहिक प्रतिक्रमण करने के बाद गुरुदेव से धर्मचर्चा की।फिर आकर सामायिक की।उसके बाद गुरुभक्ति गुरुदेव के चरणों में बैठकर की।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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