वात्सलय वारिधि का राष्ट्र के नाम सन्देश

धर्म
विद्या अध्ययन के साथ राष्ट्रीय देश की भावना से जुड़े वात्सलय वारिधि
कोपरगाँव
परम पूज्य वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने अपने उदबोधन में कहा 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ किंतु 3 वर्ष के बाद देश का शासन तंत्र कैसा हो इसका निर्णय 26 जनवरी 1950 को हुआ।उन्होनें इंगित करते हुए कहा की शासन तंत्र से अनुशासन तंत्र सीखने का अवसर मिलता है, भारत देश में अनेक धर्म,अनेक विचार अनेक संस्कृति के लोग निवास करते है,जो यह साबित करता है कि देशवासी अनेकता में एकता का संदेश लेकर निवास करते हैं।
राष्ट्र प्रेम से भरा यह उदबोधन आचार्य श्री ने गोकुलचंद दिगंबर विद्यालय कोपरगांव में समाजजन,
शिक्षकों विद्यार्थियों को संबोधित कर प्रकट किये।
आगे विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होनें बताया कि सन 47 के पूर्व अनेक नागरिकों ने देश को आजाद कराने में अपने प्राणों का बलिदान दिया है। विद्यार्थी को जीवन में संस्कार मिलना चाहिए।राष्ट्रीय भावना प्रबल हो। आप सभी प्रेम से मैत्री भाव से रहे आपके जीवन में कितने भी संकट आवे किंतु राष्ट्रीय संपदा को क्षति नहीं
पहुँचावे। और कहा राष्ट्र हित की भावना को सर्वोपरि रखें।
भारत देश को महान बनाने का प्रयास करे
आचार्य श्री ने आगे कहा भारत देश महान था, महान है और महान रहेगा। इसके साथ अपने जीवन को भी महान बनाने का पुरुषार्थ करें।
राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया
जिस थाली में खाते है उसमें छेद नही करना चाहिए
आचार्य श्री ने कहा कि जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद नहीं करना चाहिए।अर्थात भारत देश में रहते हैं तो हमें भारत देश की संपदा को क्षति नहीं पहुंचाना चाहिए, उसकी रक्षा करना चाहिए। भगवान महावीर के अनेक अनुयायियों ने अहिंसा और सत्य के बल पर देश की आजादी में अपना योगदान दिया है।
हम सभी को ज्ञात हैआचार्य श्री वर्द्धमान सागर महाराज का मंगल विहार श्री महावीरजी तीर्थ राजस्थान के लिए चल रहा है, व अभी शीत कालीन प्रवास कोपरगाँव में हो रहा है
संकलन
अभिषेक लुहाड़िया रामगंजमंडी

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