वागड़ की धर्मधरा कलिजरा में आध्यात्मिक इतिहास रचा, भव्य कलश स्थापना के साथ आर्यिका 105 सिद्धश्री माताजी का ऐतिहासिक चातुर्मास प्रारंभ
“मन में धर्म के भाव जागृत होना ही सच्चे धर्म की पहचान”— आर्यिका 105 सिद्धश्री माताजी; राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
कलिजरा (बांसवाड़ा)।
वागड़ की पावन धर्मधरा कलिजरा ने सोमवार को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनकर नया इतिहास रच दिया। पहली बार आर्यिका रत्न 105 सिद्धश्री माताजी संघ के ऐतिहासिक चातुर्मास का शुभारंभ भव्य मंगल कलश स्थापना के साथ हुआ। जैसे ही वैदिक एवं जैन परंपरा के अनुसार विधि-विधान से कलश स्थापना संपन्न हुई, पूरा पांडाल “जय जिनेन्द्र” के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर इस आयोजन ने कलिजरा को देशभर के जैन समाज के लिए विशेष पहचान दिला दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ बाहुबली परिसर में ध्वजारोहण से हुआ। ध्वजारोहण का सौभाग्य धनपाल पचोरी (नौगामा) को प्राप्त हुआ। इसके पश्चात पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया, पूर्व जिलाध्यक्ष चांदमल जैन, प्रधान सुभाषजी तथा अब्दुल गफ्फार ने दीप प्रज्ज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ किया। मंगलाचरण ईशानवी जैन एवं फैनी जैन ने भावपूर्ण प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।

कलश स्थापना से पूर्व बालिका मंडल, महिला मंडल एवं नवयुवक मंडल द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। नौगामा, बागीदौरा, बड़ोदिया, परतापुर, घाटोल, तलवाड़ा, अरथूना, बांसवाड़ा, सज्जनगढ़, कुशलगढ़, सागवाड़ा सहित मध्यप्रदेश के इंदौर एवं दक्षिण क्षेत्र से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने आर्यिका संघ के चरणों में श्रीफल अर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।
समाज अध्यक्ष रतनपाल दोसी ने बताया कि राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक चातुर्मास के साक्षी बनने पहुंचे। सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत-सत्कार किया गया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन भैयाजी एवं संजीव धनावत ने किया।
धर्म का अर्जन ही चातुर्मास का वास्तविक उद्देश्य : आर्यिका 105 सिद्धश्री माताजी
अपने प्रेरणादायी प्रवचन में आर्यिका रत्न 105 सिद्धश्री माताजी ने कहा कि “मन में धर्म के भाव जागृत होना ही सच्चे धर्म की पहचान है।” उन्होंने कहा कि चातुर्मास धन अर्जित करने का नहीं, बल्कि धर्म और आत्मकल्याण अर्जित करने का अवसर है। कलश केवल एक पात्र नहीं, बल्कि मंगल, पवित्रता, संयम और आत्मजागरण का प्रतीक है। जिस प्रकार कलश स्वयं प्रकाश का संदेश देता है, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन को सदाचार, संयम और धर्म के प्रकाश से आलोकित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज श्रद्धालुओं ने कलश स्थापना के माध्यम से साधु-संघ को अपने बीच विराजमान होने का आमंत्रण दिया है। प्रत्येक घर धर्ममय बने, प्रत्येक परिवार संस्कारमय बने और प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में आत्मकल्याण की भावना जागृत हो, यही चातुर्मास का वास्तविक उद्देश्य है। उन्होंने कलिजरा के युवाओं की सेवा, अनुशासन और समर्पण की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वागड़ की धरती पर आयोजित यह चातुर्मास पूरे भारत के लिए प्रेरणादायी और ऐतिहासिक उदाहरण बनेगा।
प्रत्येक घर में कलश का विशेष धार्मिक महत्व : आर्यिका 105 सभाश्री माताजी
आर्यिका 105 सभाश्री माताजी ने अपने संदेश में कहा कि प्रत्येक घर में स्थापित कलश समृद्धि, मंगल और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। जिस परिवार में धर्म, संस्कार और श्रद्धा का कलश स्थापित होता है, वहां सदैव सुख, शांति और समृद्धि का वास रहता है।
इन परिवारों को मिला मंगल कलश स्थापना का सौभाग्य
प्रथम कलश – गांधी बदामीलाल कुशल परिवार।
द्वितीय कलश – गांधी पंकज कुमार केसरीमल परिवार।
तृतीय कलश – दोसी नगीनलाल किशनलाल परिवार।
चतुर्थ कलश – रतनपाल मोतीलाल दोसी परिवार।
पंचम कलश – सुशील रतनपाल घोड़ा परिवार।
कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं, महिलाओं एवं नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत एकल एवं समूह नृत्य ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। पूरा आयोजन धर्म, संस्कृति, भक्ति और सामाजिक एकता का अनुपम संगम बन गया।
(प्राप्त जानकारी: सुरेशचंद गांधी, नौगामा, जिला बांसवाड़ा | संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी) 9929747312



