लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वस्तिभूषण माताजी के 31वें वर्षायोग कलश स्थापना समारोह में लिया मंगल आशीर्वाद, 3000 से अधिक श्रद्धालुओं की रही भव्य उपस्थिति
केशवरायपाटन के 4100 वर्ष प्राचीन अतिशय क्षेत्र में धर्म, आस्था और संयम का अद्भुत संगम; माताजी ने दिया रात्रि भोजन त्याग और अहिंसा का संदेश
केशवरायपाटन।
धर्म, आस्था और संयम के अनुपम वातावरण के बीच भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी के 31वें पावन वर्षायोग कलश स्थापना समारोह का भव्य आयोजन रविवार को कृषि उपज मंडी प्रांगण में संपन्न हुआ। समारोह में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने विशेष रूप से उपस्थित होकर गुरु मां का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस ऐतिहासिक आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए 3000 से अधिक श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्म लाभ अर्जित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ हुआ। इसके बाद मंगलाचरण, गुरु पूजा, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट तथा हाथरस से लाए गए विशेष कलशों की स्थापना की गई। श्रद्धालुओं ने 108 दीपों से भव्य महाआरती कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
4100 वर्ष प्राचीन अतिशय क्षेत्र का हो रहा है कायाकल्प
गुरु मां स्वस्तिभूषण माताजी की प्रेरणा से लगभग 4100 वर्ष प्राचीन अतिशय क्षेत्र का व्यापक जीर्णोद्धार और कायाकल्प कार्य तेजी से जारी है। प्राचीन प्रतिमा और इस ऐतिहासिक तीर्थ की दिव्यता को संरक्षित करने के साथ इसे नई पहचान दिलाने का कार्य निरंतर प्रगति पर है, जिससे यह क्षेत्र देशभर के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आस्था केंद्र बनता जा रहा है।

रात्रि भोजन त्यागें, अहिंसा अपनाएं और आत्मकल्याण की ओर बढ़ें : स्वस्तिभूषण माताजी
धर्मसभा को संबोधित करते हुए भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी ने कहा कि चातुर्मास आत्मकल्याण, तप, संयम और साधना का महापर्व है। इन चार महीनों में जीव-जंतुओं की रक्षा करते हुए अहिंसा का पालन करना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने कहा कि अज्ञानवश होने वाली हिंसा से बचने तथा स्वस्थ जीवन के लिए रात्रि भोजन का त्याग करना चाहिए। संयम और सदाचार ही जीवन को श्रेष्ठ बनाते हैं।
त्याग और संयम की जीवनशैली से समाज को दिशा देते हैं जैन संत : ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि जैन संतों का जीवन त्याग, तप और अनुशासन की जीवंत मिसाल है। वास्तविक सुख भौतिक संपत्ति में नहीं, बल्कि मन पर नियंत्रण, विचारों की पवित्रता और आत्मसंतोष में निहित है। उन्होंने कहा कि जैन संत अपने आदर्शों और सिद्धांतों से केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में सामाजिक और नैतिक परिवर्तन की प्रेरणा दे रहे हैं।
समारोह में बड़ी संख्या में साधु-साध्वी वृंद, समाज के गणमान्य नागरिक एवं देशभर से आए श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। पूरा आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा।
संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312



