गुरुचरणों में ही मिलता है आत्मिक सुख, धन-संपत्ति नहीं दे सकती स्थायी शांति : मुनि आदित्यसागर महाराज
उदयपुर में गुरु पूर्णिमा महा-महोत्सव एवं चातुर्मास कलश स्थापना समारोह में उमड़ा आस्था का सैलाब, सहकारिता मंत्री गौतम दक ने भी लिया गुरु कृपा का आशीर्वाद
उदयपुर।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर फतह स्कूल प्रांगण श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना से सराबोर हो उठा। आदिनाथ दिगंबर जैन चेरिटेबल ट्रस्ट, हिरण मगरी सेक्टर-11 एवं वर्षायोग समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित गुरु पूर्णिमा महा-महोत्सव एवं चातुर्मास कलश स्थापना समारोह में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री 108 आदित्यसागर महाराज ने कहा कि धन-संपत्ति, पद, प्रतिष्ठा और भौतिक उपलब्धियां मनुष्य को क्षणिक सुख तो दे सकती हैं, लेकिन स्थायी शांति और आत्मिक आनंद केवल गुरुचरणों की शरण में ही प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि गुरु का चयन भीड़, प्रसिद्धि या बाहरी आकर्षण देखकर नहीं, बल्कि उनके आचरण, चरित्र, संयम और साधना को देखकर करना चाहिए।

मुनिश्री ने अत्यंत भावपूर्ण उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार मेले में मां से बिछड़ा हुआ बच्चा खिलौनों और गुब्बारों का आकर्षण छोड़कर केवल अपनी मां को खोजता है, उसी प्रकार जीवन की भागदौड़ में भटक रहा मनुष्य भी जब तक आत्मिक शांति की खोज नहीं करेगा, तब तक उसे वास्तविक सुख नहीं मिल सकता। गुरु ही वह दिव्य मार्गदर्शक हैं जो जीव को आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग की दिशा दिखाते हैं।

समारोह में श्रद्धालुओं ने गुरु वंदना कर श्रद्धाभाव से पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, दीप प्रज्वलन, मंगलाचरण तथा णमोकार पौधरोपण जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता निभाई। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस अवसर पर राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम दक ने मुख्यमंत्री का संदेश पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि “गुरु के बिना ज्ञान नहीं, ज्ञान के बिना आत्मज्ञान नहीं और आत्मज्ञान के बिना जीवन का वास्तविक बोध संभव नहीं है।” उन्होंने गुरु परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए समाज से उसके संरक्षण और अनुसरण का आह्वान किया।
समारोह में मेवाड़, वागड़, राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर गुरु भक्ति और धर्म के प्रति अपनी अटूट आस्था का परिचय दिया। पूरे परिसर में जयघोष, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।
संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312
