धनवान नहीं धर्मात्मा बनना आवश्यक है आर्यिका विज्ञानंमति
मालथोंन
पूज्य आर्यिका 105 विज्ञानंमति माताजी पावन सानिध्य मे कल्पद्रुम महामंडल विधान शुरू हुआ जो 10 दिन तक होगा इस आयोजन की शुरुआत बुधवार से हुई जिसमे ध्वजारोहण के साथ घटयात्रा भी निकाली गयी इस अभूतपूर्व धर्ममय वातावरण मे आर्यिका विज्ञानंमति माताजी ने अपनी मंगल वाणी मे कहा धनवान नहीं धर्मात्मा बनना आवश्यक है उन्होने एक कहानी को सुनाया और बताया एक सेठ जी की धर्मपत्नी धर्मात्मा थी लेकिन सेठजी धर्म से विमुख थे सेठानी धर्म के कारण अगले भव मे राजकुमारी बनी और सेठजी ऊंट बने जब राजकुमारी का विवाह हुआ तो दहेज का समान ऊंट पर लाद दिया गया लेकिन ऊंट आगे नहीं बढ सका और व मरण को प्राप्त हुआ इसलिए कहा गया है धनवान नहीं धर्मात्मा बनो जो काम आएगा
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
