साधनों में नहीं, साध्य में है जीवन की वास्तविक सफलता : भारत गौरव गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी

धर्म

साधनों में नहीं, साध्य में है जीवन की वास्तविक सफलता : भारत गौरव गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी

केशवरायपाटन।

श्री मुनिसुव्रतनाथ स्वामी अतिशय क्षेत्र में मंगलवार को आयोजित धर्मसभा में भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी ने कहा कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य साधनों का संग्रह नहीं, बल्कि साध्य की प्राप्ति है। साधन केवल मंजिल तक पहुंचने का माध्यम हैं, जबकि आत्मकल्याण का मार्ग साध्य से ही प्रशस्त होता है।

 

आर्यिका माताजी ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में कहा कि प्रभु के दर्शन और सम्यक दर्शन की प्राप्ति ही मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है। आंखें, वाणी और चरण केवल साधन हैं, जबकि देखने, बोलने और आत्मकल्याण का वास्तविक कार्य आत्मा करती है।

 

उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में मनुष्य के पास सुख-सुविधाओं के असंख्य साधन उपलब्ध हैं, लेकिन उनसे आत्मिक शांति प्राप्त नहीं की जा सकती। वास्तविक सुख तभी संभव है, जब मनुष्य सम्यक दर्शन को अपने जीवन में धारण करे। सम्यक दर्शन प्राप्त होने पर व्यक्ति हर परिस्थिति में संतुलित, प्रसन्न और संतुष्ट रह सकता है।

 

माताजी ने कहा कि आज का मनुष्य साधनों को ही साध्य मान बैठा है। परिणामस्वरूप सुविधाओं की प्रचुरता के बावजूद मानसिक अशांति और असंतोष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने प्रेरणा देते हुए कहा कि शरीर को केवल सजाने-संवारने का माध्यम न बनाएं, बल्कि इसे आत्मकल्याण और धर्म साधना का श्रेष्ठ साधन बनाएं। जब आत्मा प्रसन्न होगी, तभी शरीर भी स्वस्थ, संतुलित और आनंदमय रहेगा।

 

धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और माताजी के आध्यात्मिक संदेशों का लाभ प्राप्त किया।

 

संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *