अफवाहों की उम्र छोटी होती है, लेकिन सत्य की चाल लंबी और अडिग होती है।

धर्म

अफवाहों की उम्र छोटी होती है, लेकिन सत्य की चाल लंबी और अडिग होती है।

अभी कुछ दिनों पूर्व एक चर्चा बड़े जोर-शोर से उठी थी। कानाफूसी से शुरू हुई वह बात देखते ही देखते ऐसे फैलने लगी, मानो किसी अनसुलझे विवाद को नया जीवन मिल गया हो। कुछ तथाकथित लोगों ने सानोधा पंचकल्याणक में आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, पूज्य मुनि श्री विशद सागर जी महाराज के आगमन को लेकर यह प्रचारित करना प्रारंभ कर दिया कि “मुनि श्री दिल्ली से सानोधा तक इतने कम समय में बिना किसी वाहन के कैसे पहुँच सकते हैं?” संदेह को ही प्रमाण मानकर अफवाहों का बाजार गर्म कर दिया गया।

 

 

किन्तु सत्य को किसी सफाई की आवश्यकता नहीं होती, वह स्वयं समय आने पर अपना परिचय दे देता है।

कल पूज्य मुनि श्री विशद सागर जी महाराज का अतिशय क्षेत्र बालाबेहट से विहार हुआ। पाली में आहारचर्या सम्पन्न करते हुए उसी दिन रात्रि विश्राम देवोदय तीर्थ, देवगढ़ में हुआ। लगभग 52 किलोमीटर का पदविहार एक ही दिन में सम्पन्न कर उन्होंने बिना एक शब्द बोले उन सभी शंकाओं का उत्तर दे दिया, जो केवल कल्पनाओं के सहारे खड़ी की गई थीं।

 

 

यही तो संयम की शक्ति है—वह तर्क-वितर्क नहीं करती, अपने आचरण से उत्तर देती है। जो लोग कल तक असंभव का शोर मचा रहे थे, उन्हें अब सत्य का साक्षात् प्रमाण मिल चुका होगा। आशा है कि वे भविष्य में किसी भी संत के विषय में निराधार बातें फैलाने से पहले संयम, मर्यादा और जिनमुद्रा के गौरव का सम्मान करना सीखेंगे।

 

 

अंततः, संतों का जीवन प्रचार से नहीं, पदविहार से बोलता है; और उनके चरणों की धूल अनेक बार उन अफवाहों को भी शांत कर देती है, जो शब्दों से नहीं, पूर्वाग्रहों से जन्म लेती हैं।

#श्रीश ललितपुर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *