12साल के इंतज़ार का स्वर्णिम अंत: इंदौर के सारांश जैन का टीम इंडिया में चयन, जैन समाज का सीना गर्व से हुआ चौड़ा
: रणजी में दमदार प्रदर्शन का मिला इनाम, पिता के त्याग और बेटे की तपस्या ने लिखी सफलता की प्रेरक गाथा
इंदौर
भारतीय क्रिकेट में प्रतिभा और धैर्य की एक और प्रेरक कहानी सामने आई है। इंदौर के होनहार ऑलराउंडर सारांश जैन को श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला के लिए पहली बार भारतीय टीम में शामिल किया गया है। 33 वर्ष की उम्र में टीम इंडिया की जर्सी पहनने का सपना पूरा होने के साथ ही वर्षों की मेहनत, संघर्ष और समर्पण रंग ले आया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे जैन समाज में गर्व और उल्लास का वातावरण है।
सारांश जैन उन खिलाड़ियों में हैं जिन्होंने कभी सुर्खियों के पीछे भागने के बजाय अपने प्रदर्शन को अपनी पहचान बनाया। घरेलू क्रिकेट में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन, टीम के प्रति समर्पण और हर चुनौती में खुद को साबित करने की क्षमता ने आखिरकार उन्हें भारतीय क्रिकेट के सर्वोच्च मंच तक पहुँचा दिया।
रणजी के नायक, अब टीम इंडिया की नई ताकत
31 मार्च 1993 को इंदौर में जन्मे सारांश जैन ने वर्ष 2014 में मध्यप्रदेश के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया। बाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के ऑफ स्पिनर के रूप में उन्होंने जल्द ही अपनी अलग पहचान बना ली। वर्ष 2021-22 में मध्यप्रदेश को पहली बार रणजी ट्रॉफी का चैंपियन बनाने वाली ऐतिहासिक टीम के वे महत्वपूर्ण सदस्य रहे। वहीं 2025-26 रणजी सीजन में केवल सात मैचों में 30 विकेट लेकर उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर मजबूती से खींचा।
रिकॉर्ड बताते हैं क्यों मिला टीम इंडिया का बुलावा
सारांश का घरेलू क्रिकेट रिकॉर्ड किसी भी चयन का मजबूत आधार है। प्रथम श्रेणी क्रिकेट के 54 मुकाबलों में 2,223 रन, 2 शतक, 14 अर्धशतक और 188 विकेट उनके नाम हैं। लिस्ट-ए क्रिकेट में 553 रन और 38 विकेट, जबकि टी-20 में भी उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की है। बल्लेबाजी और गेंदबाजी—दोनों में मैच का रुख बदलने की उनकी क्षमता उन्हें भारतीय टीम के लिए एक बेहतरीन ऑलराउंडर बनाती है।
पिता के त्याग ने बेटे का सपना साकार किया
सारांश जैन की सफलता के पीछे संघर्ष की एक भावुक कहानी भी छिपी है। जब उनके पिता कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, तब परिवार ने यह दर्द उनसे छिपाए रखा ताकि उनका ध्यान क्रिकेट से न हटे। परिवार का यह त्याग और सारांश का अटूट समर्पण आज टीम इंडिया में चयन के रूप में देश के सामने प्रेरणा बनकर खड़ा है।
जैन समाज के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण
सारांश जैन का भारतीय टेस्ट टीम में चयन केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि जैन समाज के लिए भी गर्व का विषय है। वर्षों की साधना, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा को देर भले लगे, लेकिन उसका सम्मान अवश्य मिलता है। देशभर से जैन समाज और क्रिकेट प्रेमी उन्हें शुभकामनाएँ दे रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि वह श्रीलंका की धरती पर भी अपने प्रदर्शन से भारत का गौरव बढ़ाएंगे।
— संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

