राजस्थान में पहली बार मुनिश्री 108 योगसागर महाराज ससंघ का वर्षायोग, गुरु पूर्णिमा पर कोटा बनेगा गुरुभक्ति का आध्यात्मिक धाम

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राजस्थान में पहली बार मुनिश्री 108 योगसागर महाराज ससंघ का वर्षायोग, गुरु पूर्णिमा पर कोटा बनेगा गुरुभक्ति का आध्यात्मिक धाम

 

9 अगस्त को नसियां जी, दादाबाड़ी में होगा भव्य कलश स्थापना महोत्सव, गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धालु करेंगे गुरुवंदना एवं धर्मआराधना

कोटा, 28 जुलाई।

गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व से पूर्व शिक्षा नगरी कोटा के आध्यात्मिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान, विश्व शांति हवन (यज्ञ) एवं जिनवाणी शोभायात्रा के दौरान जैसे ही परम पूज्य राष्ट्रसंत, युगश्रेष्ठ संतशिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज के सुयोग्य शिष्य, ज्येष्ठ-श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 योगसागर जी महाराज ससंघ के पावन वर्षायोग (चातुर्मास) की घोषणा हुई, पूरा मंदिर परिसर “आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की जय”, “मुनिश्री योगसागर महाराज की जय” एवं “जय जिनेन्द्र” के गगनभेदी उद्घोषों से गुंजायमान हो उठा।

 

 

श्रद्धालुओं की आंखों में श्रद्धा, हृदय में अपार उल्लास और वातावरण में धर्म की दिव्यता स्पष्ट अनुभव की गई। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर कोटा में गुरुभक्ति, साधना और धर्मआराधना का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

 

राजस्थान के लिए ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण अवसर

समिति अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ एवं निदेशक हुकम जैन ‘काका’ ने संयुक्त रूप से बताया कि यह केवल कोटा ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण राजस्थान के लिए अत्यंत गौरव और सौभाग्य का विषय है। पूज्य मुनिश्री का अधिकांश वर्षायोग अब तक मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में हुआ है, जबकि राजस्थान की पुण्यभूमि पर उनका यह पहला वर्षायोग होगा। यह सम्पूर्ण प्रदेश के आध्यात्मिक उत्थान, धर्मप्रभावना और पुण्योदय का शुभ संकेत है।

 

9 अगस्त को होगा भव्य वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव

समिति ने बताया कि रविवार, 9 अगस्त 2026 को प्रातः 8:00 बजे श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी में वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव अत्यंत भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण एवं गुरुवंदना से होगा। इसके पश्चात पूजन, कलश स्थापना, मंगल आरती एवं विविध धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न होंगे। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यह आयोजन जिनशासन की प्रभावना तथा गुरुभक्ति का ऐतिहासिक पर्व बनेगा।

 

गुरु पूर्णिमा पर होगा आचार्य विद्यासागर जी के प्रेरक वचनों का स्मरण

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धालु युगश्रेष्ठ संतशिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के प्रेरणादायी वचनों का भावपूर्ण स्मरण करेंगे—

«”हमारे ज्ञानसागर महाराज कहते थे— भले ही मैं दूर हूँ, लेकिन अपने भावों को तो निकट तक भेजता रहता हूँ।”»

इन प्रेरक वचनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं में गुरु-भक्ति, आत्मसंयम और साधना के प्रति नई ऊर्जा का संचार किया।

चातुर्मास करुणा, अहिंसा और आत्मकल्याण की महान साधना है : मुनिश्री योगसागर महाराज

 

अपने मंगल प्रवचन में पूज्य मुनिश्री योगसागर जी महाराज ने वर्षायोग की आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्ता बताते हुए कहा कि वर्षाकाल में सूक्ष्म जीवों की उत्पत्ति अधिक होती है। अहिंसा की सर्वोच्च साधना के लिए दिगम्बर मुनि चार माह तक एक ही स्थान पर रहकर तप, ध्यान, स्वाध्याय एवं आत्मचिंतन करते हैं।उन्होंने कहा कि साधु किसी नगर या व्यक्ति से नहीं, बल्कि भगवान की आज्ञा से बंधते हैं। चातुर्मास केवल एक स्थान पर निवास करना नहीं, बल्कि करुणा, दया, आत्मशुद्धि और कर्मनिर्जरा की महान साधना है।

मुनिश्री ने कहा कि वास्तविक अहिंसा केवल दूसरों पर दया करना नहीं, बल्कि अपने भीतर के राग, द्वेष और मोह का क्षय करना भी है। जब मनुष्य स्वयं पर दया करना सीख जाता है, तभी वह मुक्ति के वास्तविक मार्ग पर अग्रसर होता है।

 

उन्होंने श्रद्धालुओं से चार माह के इस आध्यात्मिक अवसर का सदुपयोग करते हुए प्रतिमा-व्रत, संयम, स्वाध्याय एवं धर्मानुशासन अपनाकर जीवन को सार्थक बनाने का आह्वान किया।

 

जहाँ संतों का वर्षायोग होता है, वह भूमि तीर्थ बन जाती है

समिति पदाधिकारियों ने कहा कि वीतराग संतों का वर्षायोग जिस स्थान पर होता है, वह भूमि तीर्थ के समान पवित्र हो जाती है। गुरुवर का सान्निध्य समाज में संयम, सदाचार, आत्मचिंतन एवं आध्यात्मिक जागरण का वातावरण निर्मित करता है।

 

उन्होंने आगम वचन—

 

“विणओ मोक्खद्वारं” (विनय ही मोक्ष का द्वार है)

 

—का स्मरण कराते हुए कहा कि गुरु के प्रति श्रद्धा, विनय एवं सेवा आत्मकल्याण का प्रथम सोपान है।

 

भक्ति और श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति हवन

 

मुख्य संयोजक धर्मचंद जैन धानोप्या एवं अर्चना (रानी) सर्राफ ने बताया कि श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान, विश्व शांति हवन (यज्ञ), जिनवाणी शोभायात्रा तथा पूर्णाहुति अत्यंत श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ सम्पन्न हुई।

 

विधानाचार्य अभिषेक भैया जी एवं शुभम भैया जी के निर्देशन में सभी धार्मिक अनुष्ठान विधिपूर्वक सम्पन्न हुए। सम्पूर्ण परिसर णमोकार महामंत्र, जैन भक्ति गीतों एवं जयघोषों से गुंजायमान रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आत्मकल्याण एवं विश्वशांति की मंगलकामना के साथ सहभागिता की।

 

आज के प्रमुख पुण्यार्जक

 

– शांतिधारा – राजेन्द्र, हुकम जैन ‘काका’ हरसोरा परिवार, महावीर मित्तल तथा श्रीमती सुशीला–विवेक ठोरा परिवार।

– चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट – राजेन्द्र–सरोज बागड़िया परिवार (सरोला) एवं विनोद कामनी गर्ग परिवार।

– भक्तामर विधान – महावीर मित्तल परिवार एवं प्रमोद बागड़िया परिवार।

– प्रशासनिक मंत्री पारस दोराया ने बताया कि चतुर्दशी होने के कारण आज आहारचर्या सम्पन्न नहीं हो सकी।

 

समस्त समाज से धर्मलाभ का आह्वान

 

पुण्योदय आयोजन समिति एवं श्री सकल दिगम्बर जैन समाज समिति, कोटा ने समस्त समाज से 9 अगस्त को आयोजित भव्य वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव में सपरिवार सहभागी बनने का आग्रह किया है।

 

समिति ने कहा कि यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गुरुभक्ति, जिनशासन की प्रभावना, समाज की एकता और अनन्त पुण्य अर्जन का दुर्लभ एवं ऐतिहासिक अवसर है।

 

भव्य वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव

 

दिनांक: रविवार, 9 अगस्त 2026

समय: प्रातः 8:00 बजे

स्थान: श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र (नसियां जी), दादाबाड़ी, कोटा (राजस्थान)

 

संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

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