“धर्म से जुड़ेगी राजनीति तो बनेगी रामायण, धर्म में घुसी राजनीति रचती है महाभारत” — राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज
सम्मेदशिखरजी में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के आठवें दिन गूंजे आध्यात्मिक संदेश; झारखंड के वित्तमंत्री डॉ. राधाकृष्ण किशोर की जिज्ञासाओं का दिया सारगर्भित समाधान, बोले— “जागरूक जीवन ही बुढ़ापे को वरदान बनाता है, सेवा में लगाया धन ही वास्तव में बढ़ता है”
मधुबन (श्री सम्मेदशिखरजी)।
गुणायतन में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के आठवें दिन आध्यात्मिक चेतना, जीवन-दर्शन और राष्ट्र निर्माण के प्रेरक संदेशों की अनुपम गूंज सुनाई दी। राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 प्रमाणसागर महाराज ने भगवान के 1008 नामों का स्मरण कर 1024 अर्घ्य नौ-नौ बार मंत्रोच्चारण के साथ प्रभु चरणों में समर्पित कराए। इसके पश्चात आयोजित शंका-समाधान कार्यक्रम में उन्होंने धर्म, शिक्षा, राजनीति, सामाजिक समरसता, वृद्धावस्था और सेवा जैसे विविध विषयों पर अपने ओजस्वी एवं विचारोत्तेजक उद्बोधन से उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।
प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि झारखंड सरकार के वित्तमंत्री डॉ. राधाकृष्ण किशोर ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक विभाजन तथा धर्म और राजनीति के संबंध में अपनी जिज्ञासाएँ रखीं। मुनिश्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “समस्या जाति नहीं, जातीयता है; संप्रदाय नहीं, संप्रदायिकता है और धर्म नहीं, धर्मान्धता समाज के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।”
उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन गुरुकुल परंपरा समानता, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला थी, जहाँ राजकुमार और सामान्य बालक एक समान शिक्षा प्राप्त करते थे। वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और समाज को जोड़ना होना चाहिए।
धर्म और राजनीति के संबंध में मुनिश्री का संदेश विशेष रूप से चर्चा का केंद्र रहा। उन्होंने कहा, “राजनीति जब धर्म से जुड़ती है तो रामायण रचती है, लेकिन धर्म में जब राजनीति प्रवेश करती है तो महाभारत मचता है। हमें रामायण चाहिए, महाभारत नहीं।” उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि धर्म से प्रेरणा लेकर लोककल्याण करें, किंतु संतों और धर्मगुरुओं को राजनीतिक स्वार्थों से दूर रहकर अपनी निष्पक्षता और पवित्रता बनाए रखनी चाहिए।
अपने संदेश को और स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, “गंदा पानी गंगा में मिल जाए तो गंगाजल बन जाता है, लेकिन गंगाजल यदि नाली में गिर जाए तो वह भी दूषित हो जाता है। संत गंगाजल की तरह पवित्र हैं, इसलिए उनकी पवित्रता हर परिस्थिति में अक्षुण्ण रहनी चाहिए।”
जीवन प्रबंधन पर प्रेरक संदेश देते हुए राष्ट्रसंत ने कहा, “जागरूक जीवन ही बुढ़ापे को वरदान बनाता है।” उन्होंने वृद्धावस्था को अनुभव, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नयन का स्वर्णिम काल बताते हुए कहा कि धन का वास्तविक मूल्य तभी है, जब वह सेवा, परोपकार और पुण्य कार्यों में लगाया जाए। “पुण्य में लगाया गया धन कभी घटता नहीं, बल्कि अनेक गुना होकर समाज और जीवन दोनों को समृद्ध करता है।”
मुनिश्री ने श्री सम्मेदशिखरजी की स्वच्छता एवं गरिमा को लेकर झारखंड सरकार के वित्तमंत्री द्वारा व्यक्त संवेदनशीलता की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि शासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से तीर्थराज की पवित्रता और व्यवस्थाएँ और अधिक सुदृढ़ होंगी।
इस अवसर पर गुणायतन परिवार ने वित्तमंत्री डॉ. राधाकृष्ण किशोर का सम्मान किया। शंका-समाधान कार्यक्रम में उपस्थित अनेक श्रद्धालुओं ने भी अपने जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तनों के अनुभव साझा किए।
प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि चातुर्मास प्रारंभ होने के उपलक्ष्य में मुनि संघ ने नैष्ठिक क्रियाएँ पूर्ण कीं तथा समस्त मुनि संघ उपवासरत रहा।
29 जुलाई का विशेष कार्यक्रम
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर 29 जुलाई को प्रातः 5 बजे से अभिषेक होगा। इसके बाद राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के मुखारविंद से 55 मिनट की वृहद शांतिधारा, श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का हवन एवं पूर्णाहुति, मुनि श्री संधान सागर महाराज का 12वाँ दीक्षा दिवस समारोह तथा दोपहर 1 बजे से चातुर्मास स्थापना एवं वर्ष 2026 के कलश स्थापना का भव्य महोत्सव आयोजित किया जाएगा।
— संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

