इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज हुआ इंदौर… राजवाड़ा पर उमड़ा श्रद्धा का विराट सागर, मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज के नगर प्रवेश ने थाम दी शहर की रफ्तार
राजकीय अतिथि मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ की अभूतपूर्व अगवानी में लाखों श्रद्धालु हुए सहभागी, आधा इंदौर बना आस्था का महाकुंभ; राजवाड़ा से दलालबाग तक गूंजे जिनशासन के जयघोष
इंदौर, 26 जुलाई।
इंदौर ने रविवार को वह ऐतिहासिक क्षण देखा, जो आने वाले वर्षों तक श्रद्धा, भक्ति और जिनशासन की गौरवगाथा के रूप में स्मरण किया जाएगा। मध्यप्रदेश शासन द्वारा राजकीय अतिथि घोषित निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव 108 श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के भव्य नगर प्रवेश ने पूरे शहर को आस्था के महाकुंभ में परिवर्तित कर दिया। अठारह पिच्छिका संतों और बीस त्यागी वृत्तियों के साथ निकली दिव्य शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि राजवाड़ा सहित आधा इंदौर शहर श्रद्धा के सागर और यातायात जाम का साक्षी बन गया।

चारों दिशाओं में केवल भक्त ही भक्त दिखाई दे रहे थे। छतों, बालकनियों और सड़कों पर उमड़ी अपार भीड़, पुष्पवर्षा, मंगलगान और “जय-जय गुरुदेव” के उद्घोषों से पूरा इंदौर धर्ममय हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो शहर की धड़कनें भी गुरुदेव के चरणों के साथ चल रही हों।
जब पूरा शहर बन गया स्वागत द्वार…
बड़े गणपति कॉर्नर, खजूरी बाजार, राजवाड़ा और जवाहर मार्ग से गुजरती शोभायात्रा के दोनों ओर श्रद्धालुओं ने अपने घरों को रंगोलियों, तोरण द्वारों और फूलों से सजाया। हाथों में आरती की थाल, कलश और भक्ति से भरे हृदय लिए श्रद्धालु पादप्रक्षालन के लिए घंटों से प्रतीक्षा कर रहे थे। हर गली, हर चौराहा और हर मार्ग पर केवल श्रद्धा का उत्सव दिखाई दे रहा था।
धर्म, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम
शोभायात्रा में आगे-आगे बैंड-बाजे, अहिंसा के श्वेत ध्वज, सुसज्जित बग्घियाँ, पारंपरिक डोल-अखाड़े, तमिलनाडु से आए अन्ना समूह तथा उज्जैन के प्रसिद्ध डमरू दल ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। मार्ग में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं व्यापारिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर गुरुदेव का अभिनंदन किया।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक गोपीकृष्ण नेमा, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय सहित जैन समाज के प्रमुख मनीष गोधा, अशोक जोशी, नवीन गोधा, आकाश जैन, आनंद गोधा, धर्मेंद्र जैन, एस.के. जैन सहित अनेक गणमान्यजन शोभायात्रा में शामिल हुए।

राजवाड़ा पर थम गई शहर की रफ्तार, उमड़ा श्रद्धा का महासागर
जैसे ही गुरुदेव राजवाड़ा चौराहे पर पहुंचे और भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए विराजमान हुए, पूरा क्षेत्र मानो मानव समुद्र में बदल गया। दूर-दूर तक केवल श्रद्धालुओं का सैलाब दिखाई दे रहा था। भीड़ इतनी विशाल थी कि शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया, लेकिन किसी के चेहरे पर अधीरता नहीं, बल्कि गुरुदर्शन का सौभाग्य पाने की खुशी थी।
वर्षों बाद इंदौर ने ऐसा दृश्य देखा, जिसने वर्ष 2020 में आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज की ऐतिहासिक अगवानी की यादों को फिर से जीवंत कर दिया।
दलालबाग में धर्मसभा, पूरे इंदौर की ओर से चातुर्मास का निवेदन
भव्य शोभायात्रा दलालबाग पहुंचकर विशाल धर्मसभा में परिवर्तित हुई। आचार्य श्री के चित्र का अनावरण श्रीमती सुशीला अशोक पाटनी, एस.के. जैन (गुना) एवं शीला डोडिया ने किया। दीप प्रज्ज्वलन महापौर, विधायक, मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा, पंच प्रमुख मनीष गोधा, नवीन गोधा, अशोक जोशी, आनंद गोधा, आकाश जैन सहित अन्य गणमान्यजनों ने किया।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि “पूरा इंदौर महानगर आज गुरुदेव के श्रीचरणों में चातुर्मास का निवेदन लेकर उपस्थित है। यह हमारे शहर का परम सौभाग्य है कि आगामी चार माह तक हमें उनके सान्निध्य का लाभ मिलेगा। यह प्रवास इंदौर के आध्यात्मिक जीवन को नई दिशा देगा।”

“जिस क्षण की प्रतीक्षा थी, वह आज पूर्ण हुई”
जैन समाज के प्रमुख नवीन गोधा ने भावुक होकर कहा कि पिछले एक माह से पूरा समाज जिस पावन क्षण की प्रतीक्षा कर रहा था, वह आज साकार हो गया। गुरुदेव का नगर प्रवेश केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि इंदौर के आध्यात्मिक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है।
“श्रमण संस्कृति जीवन को मंगलमय बनाने की साधना है” — मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि “श्रमण संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने की सर्वोत्तम पद्धति है। यह केवल आत्मकल्याण का मार्ग नहीं दिखाती, बल्कि इसके दर्शन और भक्ति मात्र से भी जीवन में संयम, संस्कार और आत्मोन्नति के बीज अंकुरित हो जाते हैं।”
उन्होंने इंदौर की श्रद्धा की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा—
“हमने सुना था कि इंदौर में जैन समाज रहता है, लेकिन आज अपनी आंखों से देख लिया कि वास्तव में इंदौर जिनशासन के प्रति समर्पित श्रद्धालुओं का नगर है।”
ऐतिहासिक बन गई यह अगवानी
इंदौर की इस अभूतपूर्व अगवानी ने यह सिद्ध कर दिया कि जब तप, त्याग और धर्म का संगम होता है, तब पूरा शहर स्वयं आगे बढ़कर उसका स्वागत करता है। मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज का यह नगर प्रवेश केवल एक शोभायात्रा नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और जिनशासन की विराट शक्ति का ऐतिहासिक उद्घोष बन गया।
अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

