समवसरण सा अलौकिक दृश्य! आचार्य श्री सुनीलसागरजी के चातुर्मास मंगल प्रवेश में उमड़ा आस्था का महासागर, दशहरा मैदान से नेमीनगर तक गूंजे जिनशासन के जयघोष
75 से अधिक दिगम्बर संतों की विराट उपस्थिति में ऐतिहासिक चातुर्मास प्रवेश सम्पन्न, हजारों श्रद्धालुओं ने किया गुरुदेव का भावभीना स्वागत; चार माह तक नेमीनगर बनेगा तप, त्याग और धर्म साधना का केंद्र।
नेमीनगर (इंदौर), 26 जुलाई।
इंदौर की धार्मिक धरती रविवार को उस समय आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो उठी, जब राष्ट्र गौरव, चतुर्थ पट्टाधीश, आचार्य भगवंत 108 श्री सुनीलसागरजी महायतिराज का भव्य चातुर्मास मंगल प्रवेश हजारों श्रद्धालुओं की जय-जयकार और धर्मध्वजों के मध्य संपन्न हुआ। दशहरा मैदान से नेमीनगर जैन कॉलोनी तक निकली विशाल मंगल प्रवेश यात्रा ने पूरे शहर को धर्ममय बना दिया। श्रद्धालुओं ने इस अद्भुत दृश्य को “समवसरण की दिव्य अनुभूति” बताया।
इंद्रपुरी चातुर्मास उत्सव के अंतर्गत आयोजित इस ऐतिहासिक अवसर का शुभारंभ प्रातःकाल दशहरा मैदान पर परम पूज्य बुंदेलखंड केसरी आचार्य श्री 108 सिद्धांतसागरजी महाराज एवं परम पूज्य प्राकृताचार्य, चतुर्थ पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 सुनीलसागरजी महाराज के मंगल मिलन से हुआ।

इस अवसर पर 75 से अधिक दिगम्बर साधु-संतों का विराट समागम उपस्थित रहा, जिसने आयोजन की भव्यता को और भी गौरवपूर्ण बना दिया।
नेमीनगर जैन कॉलोनी पहुंचने पर गुरुदेव का भव्य स्वागत मंगलाचरण, मनोहारी सांस्कृतिक नृत्य, चित्रावरण, पादप्रक्षालन एवं जिनवाणी भेंट के साथ किया गया। श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर गुरुदेव के दर्शन किए और धर्मलाभ प्राप्त किया।
अपने प्रेरणादायी प्रवचन में आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज ने कहा, “ना किसी से कोई ईर्ष्या, ना किसी से कोई दौड़, मेरी अपनी मंजिल, मेरी अपनी दौड़।” उन्होंने कहा कि यदि यह सूत्र जीवन में उतर जाए तो व्यक्ति को शांति की तलाश कहीं बाहर नहीं करनी पड़ेगी। उन्होंने गिरनार की पावन तपोभूमि का स्मरण करते हुए कहा कि अनेक मुनिराज वहां तप कर सिद्ध पद को प्राप्त हुए हैं और प्रत्येक मनुष्य भी अपने कषाय एवं विकारों का क्षय कर भगवान बनने की क्षमता रखता है।

दशहरा मैदान से नेमीनगर तक निकली भव्य प्रवेश यात्रा धर्मध्वजों, बैंड-बाजों, भक्ति संगीत और गगनभेदी जयघोषों के बीच आगे बढ़ती रही। हजारों श्रद्धालु अनुशासित भाव से यात्रा में शामिल हुए। इस दौरान गुरुदेव ने कहा, “नीचे धरती है, ऊपर आसमान है; कहीं आत्मीयता है, कहीं खींचतान, कहीं अपमान है, कहीं सम्मान। इन सबसे जो ऊपर उठ जाता है, वही वीतराग और वही भगवान है।”
गुरुदेव ने नेमीनगर के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए बताया कि यह इंदौर का प्रमुख एवं विशिष्ट जैन कॉलोनी क्षेत्र है, जहाँ भगवान नेमिनाथ की प्राचीन एवं अतिशयकारी प्रतिमा विराजमान है। उन्होंने स्मरण कराया कि वर्षों पूर्व आचार्य श्री महावीरकीर्ति जी महाराज ने उस समय भविष्यवाणी की थी, जब यह क्षेत्र घने जंगल के रूप में था कि “यहाँ जैनों का नगर बसेगा।” आज वह भविष्यवाणी नेमीनगर के रूप में साकार दिखाई दे रही है।
आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि देव, शास्त्र और गुरु का सान्निध्य अत्यंत दुर्लभ है। 84 लाख योनियों के पश्चात प्राप्त इस मनुष्य जीवन का उद्देश्य केवल सांसारिक उपलब्धियां नहीं, बल्कि कषायों और विकारों का अंत कर आत्मकल्याण की दिशा में अग्रसर होना है। उन्होंने कहा कि जिस दिन मनुष्य अपने अहंकार का त्याग कर देता है, उसी दिन से उसके मोक्षमार्ग की वास्तविक यात्रा प्रारंभ हो जाती है।
समारोह में अतिथि के रूप में श्री पवन पार्षद, श्री देवेंद्र सेठी, श्री निर्मल अग्रवाल सहित अहमदाबाद, दाहोद, दिल्ली, वडोदरा, सागवाड़ा, वागड़ क्षेत्र, उदयपुर तथा सनमतिसुनीलम फाउंडेशन, श्री सुनीलसागर युवा संघ सेवा समिति एवं देशभर से आए हजारों गुरु भक्तों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
अब आगामी चार माह तक नेमीनगर, इंदौर तप, त्याग, संयम, स्वाध्याय और धर्म आराधना की अमृतधारा से अनुप्राणित रहेगा। आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज के सान्निध्य में आयोजित होने वाले चातुर्मास के विविध धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आत्मकल्याण का दुर्लभ अवसर बनेंगे।
गुरु भक्त माही जैन धीरावत पीपलखूंट प्रतापगढ़ से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

