यदि मन में सत्य है तो यही मोक्ष का मार्ग है — गुरुदेव आदित्य सागर मुनिराजअध्यात्म विशुद्ध ज्ञान पावन वर्षायोग में श्रतुसंवेगी श्री 108 आदित्य सागर महाराज ने की गुणो पर चर्चा

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यदि मन में सत्य है तो यही मोक्ष का मार्ग है — गुरुदेव आदित्य सागर मुनिराजअध्यात्म विशुद्ध ज्ञान पावन वर्षायोग में श्रतुसंवेगी श्री 108 आदित्य सागर महाराज ने की गुणो पर चर्चा

कोटा।

चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन समाज समिति की द्वारा श्रमण श्रतुसंवेगी श्री 108 आदित्य सागर जी मुनिराज संघ का भव्य चातुर्मास के तहत जैन मंदिर रिद्धि—सिद्धि नगर कुन्हाड़ी में अध्यात्म विशुद्ध ज्ञान पावन वर्षायोग में श्रमण श्रतुसंवेगी श्री 108 आदित्य सागर जी मुनिराज ने अपने ज्ञान की वर्षा प्रवचनों के माध्यम से भक्तों पर की।

 

इस अवसर पर अप्रमित सागर और मुनि सहज सागर महाराज संघ का सानिध्य भी प्राप्त हुआ। बुधवार को दीप प्रज्ज्वलन का अवसर इंदौर से पधारे पूर्व आयकर कमिश्नर टी.के. वेद को मिला उन्होने मुनिराज आदित्य सागर के पाद प्रक्षालन सपरिवार किए। प्रवचन में सकल समाज के अध्यक्ष विमल जैन नांता,कार्याध्यक्ष जे के जैन, मंत्री विनोद जैन टोरणी,राजमल पटौदी,चातुर्मास समिति के चातुर्मास समिति अध्यक्ष टीकम चंद पाटनी,मंत्री पारस बज, रिद्धि—सिद्धि जैन मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा, सचिव पंकज खटोड़,पारस कासलीवाल,ताराचंद बडला,संजय लुहाडिया,निर्मल अजमेरा,सुरेश देई वाले,महावीर बडला,सुरेंद्र पहाड़िया,,अशोक पांडिया,बसंती लाल डोसी,धर्म चंद गोधा,अशोक गोहिल्य,नवीन पाटनी,विनोद सारसोप सहित कई लोग उपस्थित रहे।

 

 

 

श्रमण श्रतुसंवेगी श्री 108 आदित्य सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि पहचान व प्रशंसा गुणों पर निर्भर करती है। गुण आपकी यश कीर्ति को बढाते है और अवगुण कम करते है। जिन्दगी में जो कुछ भी है वह गुण—दोषो को जोड़—तोड़ ही है। गुणों का विकास कर हम आदर्श बन जाते है और दोष बढ़ने से हमारा पतन होना प्रारंभ हो जाता है।

 

 

सत्य मन है आप स्वंय तीर्थ
मुनिराज ने कहा कि यदि आपके मन में सत्य है तो आपको किसी तप की आवश्यकता नहीं है आप अपने आप तीर्थ है। यही मोक्ष का मार्ग है। जिसके मन में सत्य होता है वह सहज होता है जबकि जो झूठ बोलता है वही भयभीत रहता है। उन्होंने कहा कि झूठ की जिंदगी दिखती सुंदर है परन्तु लगती नहीं है क्योकि उस व्यक्ति को हमेशा अपने पकड़े जाने का भय होता है और जो रिश्ते झूठ पर खडे होते है वह एक दिन अवश्य समाप्त हो जाते है क्योकि सच कभी परदे में नहीं रहता है। उन्होने कहा कि वर्तमान में पंचमकाल है यहां सच को सच साबित करने में परिश्रम करना पढता है और झूठ कम मेहनत से भी सच हो जाता है। उन्होने कहा कि पहले यंत्र चला करते थे परन्तु अब षड्यंत्र हो रहे। इसलिए आप सत्य पर अडिग रहे। जो आपके सत्य से जुडेगे वह कभी आपसे नहीं टुटेगा।

संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट9929747312

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