25 जुलाई 2018 — एक ऐसा दिन, जिसे रामगंज मंडी कभी नहीं भूल सकती भाग-1

विनीत साग़र जी महाराज

25 जुलाई 2018 — एक ऐसा दिन, जिसे रामगंज मंडी कभी नहीं भूल सकती भाग-1

 

25 जुलाई 2018… यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि रामगंज मंडी के इतिहास का वह स्वर्णिम दिवस है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। जिस घटना की संभावना मात्र 1% प्रतीत होती थी, उसकी चाहत समाज के प्रत्येक हृदय में 1000% थी। अंततः पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद रामगंज मंडी को पुनः वर्षायोग (चातुर्मास) का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ।

 

 

इसी दिन चतुर्थकालीन चर्याधारी पूज्य मुनिश्री विनीत सागर जी महाराज एवं मुनिश्री चंद्रप्रभ सागर जी महाराज ने मात्र सात दिनों में लगभग 190 किलोमीटर का विहार पूर्ण कर रामगंज मंडी की पावन धरा पर पदार्पण किया। यह केवल एक प्रवेश नहीं था, बल्कि वर्षों की प्रार्थनाओं, श्रद्धा, विश्वास और गुरु-कृपा का साकार रूप था।

 

मुनिद्वय का सान्निध्य रामगंज मंडी को इससे पूर्व वर्ष 2017 की ग्रीष्मकालीन वाचना के दौरान प्राप्त हुआ था। उनके सरल स्वभाव, कठोर नियमों और संयमपूर्ण जीवन को देखकर प्रत्येक श्रद्धालु का मस्तक स्वतः श्रद्धा से झुक जाता था। समाज के प्रत्येक व्यक्ति के मन में उनके प्रति अगाध श्रद्धा थी। इसका एक कारण यह भी था कि वर्ष 2017 का उनका वर्षायोग रामगंज मंडी से मात्र 85 किलोमीटर दूर बोराव ग्राम में सम्पन्न हुआ था, जिससे यहाँ के अनेक श्रावकों का उनसे आत्मीय संबंध बन चुका था।

 

वर्ष 2018 की ग्रीष्मकालीन वाचना के समय भिंडर और चित्तौड़गढ़ सहित अनेक स्थानों से समाज के प्रतिनिधि मुनिद्वय के समक्ष चातुर्मास का निवेदन करने पहुँचते रहे। किंतु मुनिद्वय तो सदैव अपने गुरुदेव, पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के संकेतानुसार ही विहार करते थे।

 

इसी उद्देश्य से ग्रीष्मकालीन वाचना के दौरान पपौरा में विराजमान आचार्य श्री के श्रीचरणों में भी अनेक बार निवेदन किया गया। किंतु आचार्य श्री अपने चिर-परिचित अंदाज़ में केवल इतना ही आशीर्वाद देते—

 

“भावना भाओ… विशुद्धि बढ़ाओ।”

 

बस यही शब्द… और इन्हीं शब्दों में संकेत भी था तथा परीक्षा भी।

 

कुछ समय पश्चात समाचार प्राप्त हुआ कि चित्तौड़गढ़ में विराजमान मुनिद्वय के सान्निध्य में संयम कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण होना है। यह स्तंभ पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के संयम जीवन के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में निर्मित किया गया था। कार्यक्रम की तिथि थी—17 जुलाई 2018, अर्थात् आषाढ़ शुक्ल पंचमी, जो स्वयं आचार्य श्री का दीक्षा दिवस भी था।

 

यह समाचार सुनकर मन में अनेक प्रकार के विचार आने लगे।

हमने सोचा कि जब तक यह कार्यक्रम सम्पन्न नहीं होगा, तब तक विहार संभव नहीं है। कार्यक्रम प्रातःकाल था। यदि कार्यक्रम के पश्चात आहारचर्या एवं सामायिक के बाद दोपहर में विहार हो जाए, तभी रामगंज मंडी आने की संभावना बन सकती है, अन्यथा नहीं।

संयोग से उसी दिन रामगंज मंडी की नसियांजी में भी संयम कीर्ति स्तंभ का शिलान्यास होना था, जिसके निर्माण का पुण्यार्जन हमारे बाबरिया परिवार को प्राप्त हुआ था। मन में पूर्ण विश्वास था कि आज विहार अवश्य होगा। योजना भी बना ली थी कि जैसे ही चित्तौड़गढ़ का कार्यक्रम समाप्त होने का समाचार मिलेगा, हम भी तत्काल प्रस्थान कर देंगे।

किन्तु उस दिन भी विहार नहीं हुआ।फिर आशा बँधी कि शायद अगले दिन प्रातःकाल विहार हो जाएगा। परंतु अगले दिन भी ऐसा नहीं हुआ। तभी पता चला कि सदैव एक दिन छोड़कर एक दिन उपवास करने वाले पूज्य मुनिश्री चंद्रप्रभ सागर जी महाराज ने उस दिन भी उपवास कर लिया है।यह समाचार सुनते ही मानो सारी आशाएँ बिखर गईं।

वैसे भी संभावना केवल 1% थी, और अब वह भी समाप्त होती प्रतीत हो रही थी। मन पूरी तरह निराश हो चुका था।

 

18 जुलाई की सुबह तक अधिकांश लोगों ने लगभग आशा छोड़ दी थी। जिसे जहाँ जाना था, वह अपने कार्य में लग गया। ऐसा लग रहा था कि इस बार भी रामगंज मंडी की प्रतीक्षा अधूरी ही रह जाएगी।

लेकिन शायद गुरु-कृपा ने अभी अपना अंतिम निर्णय सुनाया ही नहीं था।उसी दिन, लगभग दोपहर डेढ़ बजे अचानक फोन की घंटी बजी।

उधर से जो समाचार मिला, उसने मानो पूरे वातावरण को बदल दिया—”मुनि संघ का चित्तौड़गढ़ से विहार हो चुका है। दिशा कोटा की ओर है और संकेत लंबे विहार के दिए गए हैं।”

बस… इतना सुनना था कि टूटी हुई सारी उम्मीदें फिर से जीवित हो उठीं। जो विश्वास बिखर चुका था, वह पहले से कहीं अधिक दृढ़ होकर लौट आया। शरीर में एक नई ऊर्जा का संचार हो गया।

आनन-फानन में रामगंज मंडी से एक छोटा-सा प्रतिनिधिमंडल तैयार हुआ। कोई किसी को बुलाने नहीं गया; जो जहाँ था, वहीं से निकल पड़ा। कुछ ही देर में चार लोग एक साथ चित्तौड़गढ़ के लिए रवाना हो चुके थे—

अजय सांवला, अभिषेक लुहाड़िया, अर्पित बाबरिया और मैं, सिद्धार्थ बाबरिया।उधर मुनि संघ भी उस दिन का विहार पूर्ण कर राष्ट्रीय राजमार्ग-76 स्थित एक फार्म हाउस पर रात्रि विश्राम हेतु विराजमान हो चुका था।हम भी देर शाम वहाँ पहुँचे, किंतु समय अधिक हो जाने के कारण उस दिन पूज्य मुनिद्वय के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त नहीं हो सका।हमारी हार्दिक इच्छा थी कि उसी फार्म हाउस पर रात्रि विश्राम करें, जिससे प्रातःकाल प्रथम दर्शन एवं विहार का सौभाग्य प्राप्त हो सके। किंतु चित्तौड़गढ़ समाज ने हमें अपने अतिथि के रूप में सम्मानपूर्वक मांगलिक भवन में विश्राम हेतु भेज दिया।वहीं बोराव के नवयुवक मंडल से भी भेंट हुई। वे भी उसी पवित्र उद्देश्य से आए थे। वर्ष 2017 के बोराव चातुर्मास में वे मुनिसंघ के अनन्य भक्त बन चुके थे।

 

रात्रि विश्राम तो हो गया, किंतु आँखों में नींद कहाँ थी?

मन में केवल एक ही प्रश्न था—क्या इस बार सचमुच रामगंज मंडी का स्वप्न साकार होने वाला है…?

  आगे की और जानकारी के लिए अगले भाग में  

 

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