21वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर जागा पुण्य का उदय, मनीष–सपना गोधा दंपति को मिला मुनिपुंगव सुधासागर महाराज की आहारचर्या एवं चरणवंदना का दुर्लभ सौभाग्य
गुरुचरणों में मना जीवन का सबसे पावन उत्सव; सुमतिधाम बना दिव्य संयोग का साक्षी
इंदौर।
जीवन में कुछ क्षण ऐसे आते हैं जो केवल स्मृतियाँ नहीं बनते, बल्कि ईश्वर-कृपा और पूर्वजन्म के पुण्योदय का साक्षात् अनुभव कराते हैं। 23 जुलाई का दिन धर्मनिष्ठ श्री मनीष गोधा एवं श्रीमती सपना गोधा के जीवन में ऐसा ही अविस्मरणीय अध्याय बन गया। अपनी 21वीं वैवाहिक वर्षगांठ के अवसर पर उन्हें निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज की आहारचर्या, चरणवंदना और पूजन-भक्ति का दुर्लभ लाभ प्राप्त हुआ।
विश्व प्रसिद्ध सुमतिधाम जिनालय में प्रथम बार दर्शनार्थ पधारे पूज्य मुनिश्री की आहारचर्या गोधा परिवार के सुमतिधाम के समीप उनके निवास पर सम्पन्न हुई। श्रद्धालुओं का मानना था कि ऐसे संयोग केवल भाग्य से नहीं, बल्कि वर्षों के संचित पुण्यों के उदय से प्राप्त होते हैं।

हर वर्ष अपनी वैवाहिक वर्षगांठ विदेश यात्रा के साथ मनाने वाला गोधा परिवार इस बार स्वयं को उस समय भावविभोर महसूस कर रहा था, जब उनके घर संतशिरोमणि के चरण पड़े। गुरुदेव की आहारचर्या कराने, चरण पखारने और भक्ति करने का अवसर मिलते ही पूरा परिवार श्रद्धा, समर्पण और आनंद से भर उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी इस दृश्य को जीवन के दुर्लभ आध्यात्मिक पलों में से एक बताया।

गोधा दंपति के चेहरे पर झलकती आत्मिक प्रसन्नता मानो यह संदेश दे रही थी कि संसार का सबसे बड़ा उत्सव वैभव में नहीं, बल्कि गुरुचरणों में समर्पण में है। उनकी 21वीं वैवाहिक वर्षगांठ केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं रही, बल्कि धर्म, श्रद्धा और गुरु-भक्ति का प्रेरक पर्व बन गई।

यह प्रसंग आज के समाज, विशेषकर युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी है। जन्मदिन और विवाह वर्षगांठ जैसे अवसर यदि धर्म, सेवा, दान, पूजा और संत-सान्निध्य को समर्पित किए जाएँ, तो वे केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मकल्याण और संस्कारों के संवाहक बन जाते हैं।
— अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
मो.: 99297 47312

