गणिनी आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी ससंघ का हुआ मंगल प्रवेश,*मुनि श्री प्रणुत सागर जी ससंघ से हुआ मंगल मिलन *धामनोद//से दीपक प्रधान की विशेष रिपोर्ट
बडवानी
आज प्रातः बड़वानी नगर में जैन धर्म की बड़ी आर्यिकाओं में से एक विद्या भूषण सन्मति सागर जी महा मुनिराज की शिष्य गणिनी आर्यिका मां सृष्टिभूषण मति जी माता जी ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ, पूज्य माताजी प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगल चातुर्मास के उपरांत नेमावर,सिद्धवरकूट,पावागिरी जी ऊन, सिद्ध क्षेत्रों की वंदना कर पहली बार इस क्षेत्र में आगमन हुआ है , माताजी के संघ में कुल तीन आर्यिका माताजी है, माताजी सिद्ध क्षेत्र बावनगजा की वंदना करते हुए तीर्थंकर लेणि,सिद्ध क्षेत्र मांगीतुंगी ,गजपंथा होते हुए नमोकर तीर्थ पर आगामी माह में होने वाले भव्य पंच कल्याणक में शामिल होंगी ,
माताजी के मंगल प्रवेश पर समाज के श्रावकों ने आर्यिका संघ के पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी और मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया माताजी की आगवानी के लिए यहां पूर्व से विराजित मुनि श्री प्रणुत सागर जी के संघस्थ क्षुल्लक विनियोग सागर जी ने भी आगवानी की , जिन मंदिर में आर्यिका संघ ने भगवान के वेदियों के दर्शन कर मुनि श्री प्रणुत सागर जी का भी आशीर्वाद प्राप्त किया ,धर्म सभा के पूर्व आर्यिका श्री ,मुनि श्री और क्षुल्लक जी महाराज को समाज जन ने शास्त्र भेंट किया ,कल्पना काला द्वारा मंगलाचरण किया गया, धर्म सभा में विश्वयश मति जी माता जी ने बहुत ही संक्षिप्त और मधुर आवाज में कविता की पंक्तियां प्रस्तुत की साथ ही बोला कि आप जो कुछ अच्छा होता है उसका श्रेय खुद लेना चाहते हो और यदि कुछ बुरा होता है तो भगवान को दोष देते हो ,

आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी द्वारा छोटे छोटे मुक्तक और काव्य शैली में धर्म सभा को रोचक बना दिया,माताजी ने बताया कि जिसका प्रभु से वास्ता वही सच्चा नाश्ता है, माताजी ने कहा कि पहले बाप बेटे को सिखाता था पर आज इस पश्चिमी सभ्यता में बेटा बाप को सिखा रहा है,पश्चिम की दौड़ ने सभ्यता तो सिखा दी है लेकिन संस्कृति और संस्कार बिगाड़ दिए है ,आज परिणाम की विकृति का नाम पाप है, आप आज धर्म के नाम पर लड़ रहे हो यदि धर्म के लिए लड़ते तो भगवान बन गए होते परमेष्ठि बन गए होते, आप के कही भी किए गए पाप मंदिर ने प्रक्षालित होते है ,लेकिन मंदिर में किए गए पाप कही भी प्रक्षालित नहीं होते है


माताजी ने काव्यात्मक अंदाज में बहुत अच्छी ज्ञान वर्धक और जीवन को सुधारने वाली बातें बताई माताजी ने बोला कि आज हर मां राम जैसा बेटा चाहती है और टीवी पर चरित्रहीन के चरित्र देख रही है तो राम जैसे पुत्र कैसे होंगे,पाश्चात्य कि हवा ने हमे हिला दिया है, माताजी के द्वारा महावीर जी तीर्थ पर और शाश्वत तीर्थराज सम्मेद शिखर पर साधु संतों और त्यागी वृत्तियों के आहार की व्यवस्था करवा रखी है साथी गौशाला के लिए भी चारे आदि की व्यवस्था में सहयोगी है।



मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने कहा कि आज से मंदिर का कार्य प्रारंभ हो रहा है और माताजी का उसके ठीक पहले आगमन हुआ ये शुभ मंगल का प्रतीक है भरा हुआ कलश ,गाय का बछड़े को दूध पिलाने का ये मंगल शुभ संकेत होते है और ऐसे में मां का आगमन बहुत ही शुभ संकेत है
महाराज ने बताया कि आप जिस भी व्यक्ति को जिस प्रकार से देखोगे उसी प्रकार से दिखेगा ,आज विनियोग सागर जी क्षुल्लक जी के मंगल अवतरण दिवस पर आर्यिका संघ और प्रणुत सागर जी महाराज ने मंगल आशीर्वाद प्रदान कर शास्त्र भेंट किया। प्रणुत सागर जी महाराज ने कहा कि जब पुण्य का जलवा चलता है तब पाप का दिल जलता है।
इस अवसर पर जैन समाज के महिला,पुरुष,युवा बच्चे उपस्थित थे, प्रवचन पश्चात मुनि संघ आर्यिका संघ की आहार चर्या हुई और दोपहर को माताजी का मंगल बिहार सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी के लिए हुआ। शाम को क्षुल्लक श्री विनियोग सागर जी के पाद प्रक्षालन, और प्रवचन हुए । संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

