धर्म, सेवा और समर्पण के अमर प्रतीक थे काका साहब श्री कस्तूरचंद जी बाबरिया — पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि
कुछ व्यक्तित्व समय की सीमाओं में नहीं बंधते, बल्कि अपने श्रेष्ठ कर्मों, आदर्शों और संस्कारों के कारण युगों-युगों तक जनमानस की स्मृतियों में जीवित रहते हैं। उनकी सीख, आशीर्वाद, सेवा, समर्पण, संयम, त्याग और विनम्रता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाती है। ऐसे ही प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व थे काका साहब श्री कस्तूरचंद जी बाबरिया।
उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता के साथ उन्हें भावपूर्ण नमन।
काका साहब धर्मनिष्ठ, उदार हृदय, भामाशाह और समाजहितैषी व्यक्तित्व के धनी थे। उनका संपूर्ण जीवन धर्म, संयम, साधना और सेवा को समर्पित रहा। वे स्वभाव से अत्यंत सरल, निर्मल और विनम्र थे, वहीं नियमों और अनुशासन के पालन में सदैव दृढ़ रहे। समाज की प्रत्येक गतिविधि में वे अग्रणी भूमिका निभाते हुए सभी वर्गों को साथ लेकर चलने और उन्हें नई दिशा देने का कार्य करते थे।
उन्होंने तन, मन और धन से धर्म एवं समाज सेवा का जो आदर्श स्थापित किया, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत है। उनके जीवन मूल्यों ने असंख्य लोगों के जीवन को प्रभावित किया और समाज में सेवा, सद्भाव एवं संस्कारों की अमिट छाप छोड़ी।
जिनके व्यक्तित्व की स्मृति को
नमन करती है सारी धरती,
आप रहे सदैव प्रकाशमान
दीपक की अमर ज्योति।
पुण्य स्मृति के इस पावन अवसर पर हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उनके आदर्श सदैव समाज का पथ आलोकित करते रहें। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि और विनम्र विनयांजलि है।
— श्रद्धांजलि अर्पित
पदमकुमार, सुलोचना एवं अभिषेक लुहाड़िया
रामगंजमंडी
