जैन धर्म के 22 वे तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक धूमधाम से मनाया चढ़ाया निर्वाण लाडू 

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जैन धर्म के 22 वे तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक धूमधाम से मनाया चढ़ाया निर्वाण लाडू

धामनोद// दीपक प्रधान की रिपोर्ट

बड़वानी मेंजैन धर्म के बाईसवें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक आज से कई वर्ष पूर्व आज ही की तिथि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की शुभ तिथि सप्तमी को गुजरात राज्य के गिरनार पर्वत से कठोर तप कर करोड़ों मुनियों के साथ योग निरोध कर के इस नश्वर काया से और इस सृष्टि के जन्म मरण से मुक्त हो कर निर्वाण पाकर मोक्ष प्राप्त किया था,गिरनार पर्वत को उर्जयंत गिरी के नाम से भी जाना जाता है साथ ही भगवान नेमिनाथ नारायण श्री कृष्ण के चचेरे भाई भी थे एवं बाल ब्रह्मचारी भगवान है,भगवान नेमिनाथ शौरीपुर के राजकुमार थे जब विवाह के लिए बारात लेकर जुनागढ के राजा के यहां राजकुमारी राजुल को ब्याहने जा रहे थे तब पशुओं के क्रंदन और रोने की आवाज सुन कर नेमी कुमार ने पूछा कि ये पशु क्यों रुदन कर रहे है उन्हें जैसे ही बताया कि ये कल बारातियो को भोजन ने परोसा जाएगा वैसे ही नेमी कुमार ने बोला कि मेरे विवाह में इतने निरीह पशुओं का वध किया जाएगा और भोजन में परोसा जाएगा तत्क्षण ही नेमी कुमार को वैराग्य हो गया ,और जैनेश्वरी दीक्षा ले कर सब कुछ त्याग दिया और वैराग्य ले कर गिरनार पर्वत पर साधना करने चल दिए और अपनी नश्वर काया को भी त्याग दिया

 

इसी शुभ अवसर पर दिगंबर जैन समाज बड़वानी द्वारा स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर में जहां की मूल नायक भी भगवान नेमिनाथ ही है और जैन समाज बड़वानी द्वारा इस मंदिर का शताब्दी वर्ष भी मनाया जाकर भगवान की इस वर्ष 26 जनवरी पर उच्च कमलासन पर विराजित किया गया है का प्रातः भगवान के मंगलाष्टक, अभिषेक पाठ,मंत्रोच्चार से मूल नायक भगवान के अभिषेक,शांतिधारा, नित्य नियम की पूजन ,भगवान नेमिनाथ की पूजन कर निर्वाण कांड का वाचन कर निर्वाण लाडू चढ़ाया गया

 

 

 

, भगवान के प्रथम अभिषेक और शांति धारा करने का सौभाग्य दीपचंद जी रतन लाल जी ,गौरव पहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ तो भगवान को निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य मीनाक्षी प्रिंस जी मंगल सेंधवा को प्राप्त हुआ इस अवसर पर समाज के युवा,पुरुष,महिला बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे ।

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