“बोलने का लहजा ही बनाता है व्यक्तित्व, मधुर वाणी से दिलों में अमर बनें” — अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज
पुष्पगिरी वर्षायोग में गुरु भक्तों को दिया जीवन प्रबंधन का संदेश, कहा— धन नहीं, सद्व्यवहार और मधुर वाणी ही सच्ची पहचान है।
पुष्पगिरी (सोनकच्छ)।
पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज के सानिध्य में अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय श्री 108 पियूष सागरजी महाराज ससंघ वर्षायोग के लिए पुष्पगिरी में विराजमान हैं। इसी क्रम में आयोजित धर्मसभा में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने जीवन को सफल और सार्थक बनाने वाले प्रेरक सूत्र बताए।
आचार्य श्री ने कहा कि “हमारे बोलने का लहजा, बोलने की टोन और बात कहने का अंदाज हमेशा मर्यादा और दायरे में होना चाहिए। धरती पर व्यक्ति अमीर तो बन सकता है, लेकिन अमर नहीं। अमरता धन से नहीं, बल्कि मधुर वाणी, श्रेष्ठ व्यवहार और अच्छे संस्कारों से प्राप्त होती है।”
उन्होंने कहा कि सोच-समझकर बोले गए शब्द किसी के हृदय में स्थायी स्थान बना देते हैं, जबकि कटु वाणी और कठोर व्यवहार व्यक्ति को लोगों के दिलों से दूर कर देते हैं। व्यक्ति का व्यक्तित्व उसके शब्दों और व्यवहार से ही पहचाना जाता है।
आचार्य श्री ने कहा कि “बोलकर सोचना और सोचकर बोलना— इन दोनों के बीच का अंतर ही व्यक्ति के व्यक्तित्व को बदल देता है।” उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति बात तो सुन लेता है, लेकिन बात का वास्तविक अर्थ बहुत कम लोग समझ पाते हैं। इसलिए शब्दों का चयन सदैव संयम और विवेक के साथ करना चाहिए।
प्रवचन के दौरान उन्होंने जीवन का गूढ़ संदेश देते हुए कहा कि “इंसान जब करवट लेता है तो दिशा बदल जाती है और जब वक्त बदलता है तो दशा बदल जाती है। सही समय ही बुरे समय का सबसे बड़ा उपचार है।”
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और आचार्य श्री के प्रेरक वचनों से आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त की।
जानकारी: प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा एवं पियूष कासलीवाल (औरंगाबाद)
संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी।9929747312

