गुरु से बड़ा कोई मित्र नहीं, सही संगति ही सफलता की असली कुंजी : मुनि आदित्य सागर महाराज

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गुरु से बड़ा कोई मित्र नहीं, सही संगति ही सफलता की असली कुंजी : मुनि आदित्य सागर महाराज

 

उदयपुर में धर्मसभा में दिए सफल जीवन के सूत्र, बोले— ज्ञानी का साथ जीवन संवारता है, गलत संगति विनाश का कारण बनती है

 

उदयपुर।

आयड़ चैत्यालय में शनिवार को आयोजित प्रातःकालीन धर्मसभा में श्रुतसंवेगी मुनिश्री 108 आदित्य सागर महाराज ने जीवन को सफल, सुखी और सार्थक बनाने के महत्वपूर्ण सूत्र बताते हुए कहा कि व्यक्ति के जीवन की दिशा, चरित्र और सफलता उसकी संगति पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि यदि जीवन में स्थायी सुख और सफलता चाहिए तो ज्ञानवान, विवेकशील और सदाचारी लोगों की मित्रता अपनाएं, जबकि दुष्ट, स्वार्थी और गलत प्रवृत्ति के लोगों से सदैव दूरी बनाए रखें।

 

 

 

मुनिश्री ने कहा कि बिना किसी व्यक्ति को जाने-समझे मित्रता करना अंततः पछतावे का कारण बनता है। संसार का प्रत्येक जीव सुख चाहता है, लेकिन अधिकांश लोग दुखी हैं। इसका प्रमुख कारण बाहरी परिस्थितियां नहीं, बल्कि स्वयं के गलत निर्णय और गलत संगति है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को यह विवेक विकसित करना चाहिए कि किसके साथ रहना है और किससे दूरी बनाए रखनी है।

 

 

उन्होंने कहा कि इंद्रिय सुखों की असीम लालसा भी मनुष्य के दुख का बड़ा कारण है। जो व्यक्ति इंद्रियों का दास बन जाता है, वह कभी स्थायी सुख प्राप्त नहीं कर सकता। वास्तविक आनंद तभी मिलता है जब मनुष्य अपनी इच्छाओं और इंद्रियों पर नियंत्रण स्थापित करता है।

 

 

धर्मसभा में मुनिश्री ने कहा कि मूर्ख व्यक्ति से मित्रता कभी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “ज्ञानी शत्रु भी हितकारी हो सकता है, लेकिन मूर्ख मित्र सदैव हानि पहुंचाता है।” मूर्ख व्यक्ति न तो सही मार्गदर्शन दे सकता है और न ही परिस्थितियों की सही समझ रखता है। उसके साथ रहने वाला व्यक्ति कई बार सही होते हुए भी गलत सिद्ध हो जाता है।

 

 

उन्होंने स्वार्थी लोगों से भी सावधान रहने का संदेश देते हुए कहा कि ऐसे लोग हर संबंध में केवल अपना लाभ देखते हैं। चाहे आप उनके लिए कितना भी त्याग करें, वे आपकी भावनाओं का सम्मान नहीं कर पाते। इसी प्रकार अधूरे ज्ञान वाले, विवादित व्यक्तियों तथा व्यसनों में लिप्त लोगों की संगति भी व्यक्ति के चरित्र, प्रतिष्ठा और भविष्य के लिए घातक सिद्ध होती है।

 

 

प्रवचन के समापन पर मुनिश्री ने कहा कि “गुरु से बड़ा और सच्चा मित्र इस संसार में कोई नहीं है।” गुरु ही ज्ञान की गंगा प्रवाहित कर मनुष्य को सत्य, सदाचार और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाते हैं तथा जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं।

 

 

रविवार को होगा मंगल विहार और भव्य धार्मिक आयोजन

मुनिश्री 108 आदित्य सागर महाराज ससंघ रविवार प्रातः आयड़ चैत्यालय से श्रीजी की पालकी एवं गाजे-बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा के रूप में विहार करेंगे। प्रातः 8 बजे खारा कुआं स्थित शीतलधाम पहुंचने पर मांगलिक कार्यक्रम होंगे। इसके पश्चात सुबह 9 बजे धर्मसभा आयोजित होगी तथा दोपहर में 151 दंपतियों की सहभागिता से भव्य भक्तामर विधान का आयोजन संपन्न होगा।

 

— संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

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