गुरुदेव सुधा सागर महाराज से प्रश्न करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने पूछा इंदौर चातुर्मास के पीछे आपकी भावना क्या है मैं जान सकता हूं?
मक्सी
परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 सुधासागर महाराज का मंगल विहार इंदौर चातुर्मास हेतु चल रहा है इस हेतु आज मक्सी से दोपहर की बेला में मंगल विहार करते हुए गुरुदेव ने मक्सी से आगे चलते हुए रात्रि विश्राम किया जहा शंका समाधान कार्यक्रम हुआ।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने गुरुदेव के समक्ष आशीर्वाद लिया एवं उन्होंने शंका समाधान कार्यक्रम में अपनी शंका रखते हुए गुरुदेव को नमन करते हुए कहा कि प्रणाम करता हूं गुरुजी, मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि आप इंदौर आए हैं,आ रहे हैं, हम सब लोगों का पुण्य जागृत हुआ है,वैसे आपकी प्रतीक्षा बहुत सारे लोग कर रहे थे, पर आपने इंदौर को चुना,इसके पीछे आपकी भावना क्या मैं जान सकता हूं क्या?
गुरुदेव ने मधुर मुस्कान के साथ कहा नदीपर्वत से निकलती है, नदी का कोई उद्देश्य नहीं होता, वो तो बहती जाती.रास्ते में कोई बांध बांध लेता है और नहर निकाल लेता है तो नदी कुछ बोलती नहीं है। बस इतना बहता पानी रमता जोगी साधु बहता रहता है नदी का कोई उद्देश्य नहीं होता।
नदी का उद्देश्य होता है प्रभावायमान अनंत सागर की यात्रा ऐसे ही साधु का कोई भी उद्देश्य नहीं होता उद्देश्य होता है नदी किनारे रहने वालों का उद्देश्य होता है नदी कि अपनी गति ऊपर की तरफ करता है।
, इसी प्रकार साधु निरुद्देश रहता है,कोई उद्देश्य नहीं, उसका काम तो बहना है, चलना है,अनंत सागर में मिलना है, लेकिन जब साधु बहता है तो किनारे रहने वाले,आप जैसे लोगों को ये लगता है कि यह पानी बह जाएगा,हम प्यासे रह जाएंगे तो चातुर्मास रूपी बांध बांध देतेहैं, नदी रुकना नहीं चाहे.नदी को रोका जाता है, लेकिन श्रावक को शुरू से पढ़ाया जाता है कि नदी को रोकना तुम जानो,
महाराज श्री ने कहा जो नदी को नहीं रोक सकता तो नदी के किनारे रहकरके भी प्यासा हो जाता है और जो नदी रुक जाती है,वह
अपनी अनंत यात्रा खो देती है,
इसलिए हमें तो बहने दो और तुम्हें रोकने दो और आज आपके इंदौर वालों ने समर्पित करके चातुर्मास का बांध बांध लिया है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

