अष्टापद बद्रीनाथ तीर्थ से मुनिपुंगव निर्यापक सुधासागर महाराज को विशेष आमंत्रण, मक्सी में श्रीफल भेंट कर लिया मंगल आशीर्वाद

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अष्टापद बद्रीनाथ तीर्थ से मुनिपुंगव निर्यापक सुधासागर महाराज को विशेष आमंत्रण, मक्सी में श्रीफल भेंट कर लिया मंगल आशीर्वाद

तीर्थ ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने किया विनम्र निवेदन, अष्टापद बद्रीनाथ की गौरवशाली संत परंपरा का भी कराया स्मरण

 

मक्सी।

मुनिपुंगव 108 निर्यापक श्री सुधासागर जी महाराज को उत्तराखंड स्थित पावन श्री 1008 आदिनाथ निर्वाण स्थली अष्टापद बद्रीनाथ तीर्थ पधारने का विशेष निवेदन किया गया। मक्सी स्थित तीर्थ क्षेत्र में अष्टापद बद्रीनाथ तीर्थ के ट्रस्टियों ने गुरुदेव को श्रीफल अर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया तथा तीर्थ आगमन का भावपूर्ण आमंत्रण प्रस्तुत किया।

 

 

इस अवसर पर तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री कीर्ति पांड्या, महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, ट्रस्टी प्रदीप चौधरी तथा बाहुबली पांड्या उपस्थित रहे। सभी ने गुरुदेव के श्रीचरणों में विनय अर्पित करते हुए तीर्थ की आध्यात्मिक परंपरा एवं वहां विराजमान श्रद्धालुओं की भावनाओं से अवगत कराया।

 

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि श्री 1008 आदिनाथ निर्वाण स्थली अष्टापद बद्रीनाथ दिगंबर जैन समाज का अत्यंत श्रद्धेय तीर्थ है, जहां समय-समय पर अनेक पूज्य आचार्यों, मुनिराजों, आर्यिकाओं एवं क्षुल्लकों का मंगल आगमन होता रहा है। सन् 1970 में एलाचार्य श्री 108 विद्यानंद जी महाराज के पावन आगमन के बाद से यह तीर्थ संत परंपरा का महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र बना हुआ है।

 

 

इसके पश्चात मुनि श्री नमिसागर, वर्द्धमान सागर, सुमेर सागर, जीवेन्द्र सागर, सुबाहू सागर, गुप्ति सागर, नयन सागर, निर्णय सागर, संयम सागर, चिराग सागर, उदार सागर, प्रज्ञा सागर, शशांक सागर, प्राप्ति सागर, वासुपूज्य सागर, कनक सागर, विशोक सागर, अभिनंदन सागर, प्रमुख सागर, प्रगल्प सागर सहित अनेक संतों एवं आर्यिकाओं का इस तीर्थ पर मंगल आगमन हो चुका है।

 

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि विगत वर्षों में आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज तथा गुरु मां पूर्णमति माताजी ने भी तीर्थ के पट खोलकर धर्म प्रभावना को नई ऊंचाइयां प्रदान की थीं।

 

मुनिपुंगव निर्यापक श्री सुधासागर जी महाराज से प्राप्त मंगल आशीर्वाद के बाद तीर्थ ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने आशा व्यक्त की कि गुरुदेव का अष्टापद बद्रीनाथ तीर्थ पर मंगल आगमन समस्त श्रद्धालुओं के लिए ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय आध्यात्मिक अवसर सिद्ध होगा।

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