युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज*लेख –विजय धुर्रा संयोजक मध्यप्रदेश महासभा
इस युग का सौभाग्य है कि इस युग में आचार्य श्री जन्मे और हम सब का सौभाग्य है कि हम उनके युग में पैदा हुए
श्रमण संस्कृति जिनकी आभा से दीप्तिमान है ऐसे युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य प्रवर श्री108 विद्यासागरजी महाराज ने आज के दिन आचार्य ज्ञानसागरजी महाराज से 30 जून, 1968में अजमेर में मुनि दीक्षा लेकर इस युग का सूत्रपात किया दीक्षा लेने के साथ ही उनकी कठोर साधना प्रारंभ हो गई उन्हें आचार्य पद आचार्य ज्ञानसागरजी ने 22 नवम्बर, 1972 में दिया।
उनके जीवन पर चरित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री108 शांतिसागर महाराज के उपदेशामृत ने बचपन में विरक्ति के बीज बोए और आजीवन ब्रह्मचर्यव्रत आचार्यश्री देशभूषणजी महाराज से ग्रहण किया। आचार्य श्री ज्ञानसागर महाराज से शिक्षा और दीक्षा प्राप्त की।सन उन्नीस सो सत्तर से संघ बनाना प्रारंभ किया और अनवरत वर्षों तक वे शिक्षा दीक्षा प्रदान करते रहे उनके कर-कमलों से सन दो हज़ार बाईस में कुंडलपुर में अंतिम दीक्षाये हुई।
आचार्य श्री का राष्ट्रीय चिंतन था वे सबसे पहले अंतिम पंक्ति के व्यक्ति के जीवन को अहिंसा के माध्यम से ऊंचाईया देने पर विचार करते थे इसी का परिणाम रहा कि उन्होंने हथकरघा श्रमदान चल चरखा जैन रोजगार मुखी उपक्रमो की प्रेरणा दे देश भर हजारों लोगों को अहिंसक रोजगार दिलाया। अहिंसक वस्त्रो के उपयोग की प्रेरणा दी।आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज को जहां प्राकृत, अपभ्रंश, संस्कृत, मराठी, हिन्दी, कत्रड़ तथा अंग्रेजी आदि अनेक भाषाओं में प्रकाण्ड पाण्डित्य प्राप्त था,
वहीं दर्शन, इतिहास, संस्कृति व्याकरण, साहित्य मनोविज्ञान और योग आदि विधाओं में भी उपलब्ध थे। आपमें आशु-कवित्व तथापि प्रायुत्पन्न अत्यंत प्रशष्य गुण था।। आपने भव्य जीवों के आत्मकल्याण हेतु अनेक ग्रन्थों का प्रकाशन करवाया ।
आपके द्वारा लिखित मूकमाटी (महाकाव्य) आज देशभर में विद्वत्समाज और साहित्यकारों के बीच बहुचर्चित है। इसके अतिरिक्त चेतना के गहराव में (सचित्र प्रतिनिधि काव्य संकलन) तथा नर्मदा का नरम कंकर, डूबो मत/लगाओ डुबकी, तोता क्यों रोता ? काव्य संग्रह भी हैं। इनके अतिरिक्त आपने समयसार, प्रवचनसार, नियमसार, द्वादशानुप्रेक्षा, पंचास्तिकाय, अष्टापाहुड, रत्नकरण्डक, श्रावकचार, समणसुत, देवागम-स्त्रोत, स्वयंभूस्त्रोत, इष्टोपदेश, समाधितंत्र., नंदीश्वरभक्ति, द्रव्यसंग्रह, समयसार-कलश तथा गोमटेश-शुद्धि आदि का सरल एवं सुबोध पद्यानुवाद भी किया है।
लगभग 25 प्रवचन संग्रहों के अतिरिक्त अनेक स्फुट काव्य संस्कृत, हिन्दी, प्राकृत, अंग्रेजी तथा कन्नड़ आदि भाषाओं में लिखे हैं। आपके द्वारा 425 से अधिक मुनि-आर्यिका ऐलक क्षुल्लको को दीक्षा प्रदान कर संत मार्ग पर बढ़ने की प्रेरणा दी भारत के लोकप्रिय नेता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के शब्दों में कहें तो “आचार्यश्री न केवल तपस्वी हैं बल्कि दार्शनिक एवं समाज सुधारक भी हैं। शिक्षा, स्त्री शिक्षा, पशु कल्याण तथा पर्यावरण के क्षेत्र में उनकी प्रेरणा से कितनी ही परियोजनाएं चल रही हैं”
जबलपुर मध्यप्रदेश रामटेक महाराष्ट्र ललितपुर उत्तर प्रदेश सहित अनेक स्थानों पर बेटीयों को संस्कारित शिक्षा हेतु प्रतिभास्थली की श्रंखला खड़ी की गई जो बेटीओ की शिक्षा का एक अग्रणी संस्थान है ज्ञातव्य हो “ज्ञानपीठ पुरस्कार संज्ञक भारतीय साहित्य का श्रेष्ठ पुरस्कार प्रदाता भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली द्वारा “मूकमाटी महाकाव्य का हिन्दी व उसके मराठी, बंगला, कन्नड़ अनुवादों के प्रकाशन उपरान्त अंग्रेजी भाषा में अनुवादित “मूकमाटी कृति द सायलेंट अर्थ का भी प्रकाशन किया गया है
आचार्य श्री ने इस नश्वर देह का त्याग सल्लेखना पूर्वक 18फरवरी 2024को डोंगरगढ़ तीर्थ पर किया आज भले वे हमारे बीच नहीं हैं उनका आशीर्वाद उनकी प्रेरणा स्पद शिक्षा इस भारत वर्ष के नागरिकों का धार्मिक सामाजिक जीवन स्तर ऊंचा उठातीं रहेंगी
उनसठवे दीक्षा दिवस पर बारम्बार नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु
रीना –विजय धुर्रा मंत्री जैन समाज अशोक नगर संयोजक मध्यप्रदेश महासभा
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

