सिर्फ सांस लेना जीवन नहीं, जीवन को सार्थक बनाना ही सच्ची जिंदगी है” — अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
जिन्दा रहना, जिन्दा लगना और जिन्दा होना’ का अद्भुत आध्यात्मिक विश्लेषण, प्रेम, सेवा, त्याग और परोपकार को बताया जीवन की वास्तविक पहचान
पुष्पगिरी।
पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज के सानिध्य में आयोजित धर्मसभा में अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज ने जीवन के गहन आध्यात्मिक रहस्यों को अत्यंत सरल और प्रेरक शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि “जिन्दा रहना, जिन्दा लगना और जिन्दा होना—इन तीनों में बहुत बड़ा अंतर है।”
आचार्य श्री ने कहा कि जीते-जी सार्थक जीवन जीना और मृत्यु के बाद भी लोगों के हृदयों में सम्मान और स्मृति के रूप में जीवित रहना ही सच्चे जीवन की पहचान है। यह तभी संभव है जब मनुष्य अपने जीवन में प्रेम, सेवा, दान, परोपकार और त्याग जैसे श्रेष्ठ मूल्यों को अपनाता है। ऐसा व्यक्ति केवल जीवन नहीं बिताता, बल्कि युगों तक लोगों के हृदयों में जीवित रहता है।
उन्होंने कहा कि ‘जिन्दा लगना’ वह स्थिति है, जब व्यक्ति केवल सांसें ले रहा होता है, लेकिन उसके भीतर जीने का उत्साह, उद्देश्य और आनंद समाप्त हो चुका होता है। इच्छाओं के बिना, निराशा और थकान से भरा जीवन केवल जीवित दिखाई देता है, वास्तव में वह जीवन नहीं होता। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक अच्छा दिन सुखद नींद देता है, उसी प्रकार श्रेष्ठ कर्मों से जिया गया जीवन सुखद मृत्यु का मार्ग प्रशस्त करता है।
आचार्य श्री ने अपनी ओजस्वी वाणी में कहा—
“जिन्दा हूँ जिस तरह कि ग़मे-ज़िन्दगी नहीं,
जलता हुआ दिया हूँ मगर रौशन नहीं।”
उन्होंने कहा कि ‘जिन्दा होना’ अर्थात् जिन्दादिल बनना है। ऐसा व्यक्ति सेवा, करुणा, परोपकार, सद्भाव, प्रेम, उदारता, भक्ति, समर्पण और विश्वास जैसे गुणों से परिपूर्ण होता है। वह हर अच्छे कार्य में अग्रणी रहता है और अपने व्यवहार से लोगों के दिलों में स्थायी स्थान बना लेता है। ऐसा व्यक्ति समाज का भरोसेमंद, प्रेरणास्रोत और आदर्श बन जाता है।
आचार्य श्री के प्रेरणादायी उद्बोधन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन को केवल बिताने के बजाय उसे उद्देश्यपूर्ण, मूल्यवान और लोकहितकारी बनाने का संदेश दिया। धर्मसभा में श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर उनके विचारों का श्रवण किया।
— जानकारी स्रोत: प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा एवं पीयूष कासलीवाल, औरंगाबाद।
संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी।9929747312

