उदयनगर में अझप्पजोगं (अध्यात्म योग) का आयोजन, आचार्य श्री सुनील सागरजी ने दिया पर्यावरण संरक्षण और साधना का संदेश* 

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उदयनगर में अझप्पजोगं (अध्यात्म योग) का आयोजन, आचार्य श्री सुनील सागरजी ने दिया पर्यावरण संरक्षण और साधना का संदेश*

इंदौर उदयनगर, 17 जुलाई।

आचार्य श्री 108सुनील सागरजी महाराज के पावन सानिध्य में शुक्रवार, 17 जुलाई को प्रातःकाल श्री चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर, उदय नगर में अध्यात्म योग का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आत्मशांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

 

 

कार्यक्रम के दौरान उदय नगर महिला मंडल द्वारा आधुनिक जीवनशैली, संसाधनों के दुरुपयोग तथा पर्यावरण संरक्षण पर आधारित एक प्रेरणादायी नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहा।

 

इसके पश्चात अपने मंगल प्रवचन में आचार्य श्री सुनील सागरजी महाराज ने कहा कि “साधन समय के साथ आउट ऑफ डेट हो जाते हैं, लेकिन साधना सदैव अप-टू-डेट रहती है। इसलिए साधनों पर नहीं, साधना पर विश्वास करना चाहिए।”

 

 

उन्होंने कहा कि मनुष्य ने भौतिक साधनों को प्राप्त कर स्वयं को समृद्ध समझ लिया, लेकिन उन्हीं साधनों ने उसे प्रकृति से दूर कर दिया। आज नगर विस्तार, सड़क निर्माण और विकास के नाम पर अंधाधुंध वृक्षों की कटाई की जा रही है, जबकि वृक्षों के बिना जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है। कारखानों और वाहनों से निकलने वाला धुआँ तथा पटाखों से उत्पन्न जहरीली गैसें पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं।

 

 

आचार्यश्री ने कहा कि आज का मनुष्य पहले धन कमाने की दौड़ में अपने शरीर और पर्यावरण को नष्ट करता है, फिर उसी धन को अस्पतालों में शरीर बचाने के लिए खर्च करता है, लेकिन अंत में न तन बचता है और न धन। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान तभी सार्थक है जब वह व्यवहार में भी दिखाई दे।

 

 

उन्होंने जल संरक्षण पर विशेष बल देते हुए बताया कि पूर्वकाल में लोग एक ही पानी का कई बार सदुपयोग करते थे। त्यागी और व्रती आज भी सीमित जल में अपना पूरा दिन व्यतीत कर लेते हैं। पहले नहाने, कपड़े धोने, पोंछा लगाने और अन्य कार्यों में एक ही पानी का क्रमबद्ध उपयोग किया जाता था। इसी प्रकार पुराने वस्त्रों का भी पुनः उपयोग कर संसाधनों का सम्मान किया जाता था। उन्होंने कहा कि आधुनिकता तभी सार्थक है जब उसमें संस्कार, संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी भी शामिल हो।

 

प्रवचन के अंत में आचार्यश्री ने सभी से संयमित जीवनशैली अपनाने, संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा पर्यावरण संरक्षण को जीवन का संकल्प बनाने का आह्वान किया। और सांध्यकाल में गुरदेव के मुखारबिंद से आध्यात्मिक प्रश्नों का समाधान किया गया इसके पश्चात गुरदेव की भक्तिमय आरती सपन्न हुई और हजारों की संख्या में श्रावकों ने गुरुचरणों में अपनी भक्ति प्रस्तुत करी।

    माही जैन धीरावत से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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