सम्मेद शिखर की पावन वंदना के लिए राष्ट्रसंत मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज का मंगल विहार, श्रद्धालुओं में उमड़ा अपार उत्साह
गौतम गणधर टोंक पर होगा रात्रि विश्राम, गुरुवार प्रातः 18 किलोमीटर की पर्वत वंदना के बाद संपन्न होगी आहारचर्या
गिरीडीह। जैन धर्म के सर्वोच्च तीर्थों में शुमार पवित्र श्री सम्मेद शिखरजी की वंदना के लिए राष्ट्रसंत परम पूज्य मुनिश्री 108 प्रमाण सागर महाराज ससंघ ने बुधवार दोपहर 2 बजे मंगल विहार प्रारंभ किया। इस आध्यात्मिक यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्ति का वातावरण देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएँ मुनिश्री के दर्शन, वंदना और मंगल विहार का पुण्य लाभ लेने के लिए उपस्थित रहे।
मुनिश्री लगभग 9 किलोमीटर की कठिन पर्वतीय साधना के बाद पवित्र गौतम गणधर टोंक स्थित विश्राम भवन में रात्रि विश्राम करेंगे। रात्रि के दौरान स्वाध्याय, ध्यान, जप एवं आत्मचिंतन के माध्यम से संयममय साधना संपन्न होगी।
प्रवक्ता के अनुसार गुरुवार प्रातः लगभग 5 बजे मुनिश्री गौतम गणधर टोंक से पुनः विहार प्रारंभ करेंगे। मार्ग में स्थित विभिन्न पावन जिनालयों एवं टोंकों की वंदना करते हुए लगभग 9 किलोमीटर की पर्वत यात्रा पूर्ण कर वे सुबह करीब 10 बजे पर्वत से नीचे पधारेंगे। इसके बाद विधिपूर्वक आहारचर्या संपन्न होगी। इस प्रकार मुनिश्री की कुल 18 किलोमीटर की कठिन पर्वत वंदना तप, त्याग और संयम का अनुपम उदाहरण बनेगी।



गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने सभी श्रद्धालुओं से तीर्थ की पवित्रता, अनुशासन और समय-मर्यादा का पालन करते हुए इस मंगल विहार एवं पर्वत वंदना का पुण्य लाभ लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु संयम, शांति और गहन श्रद्धा के साथ धर्माराधना में सहभागी बनें तथा इस दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर को आत्मकल्याण का माध्यम बनाएं।
— संकलित जानकारी: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
